जागरण संवाददाता, देहरादून:

प्रगति और ताइवान फाउंडेशन फॉर डेमोक्रेसी की ओर से आयोजित लोकतंत्र परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका विषय पर आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन वक्ताओं ने सही चुने, सभी चुने को लोकतंत्र का मूलमंत्र बताया। कहाकि लोकतंत्र में जब तक आधी आबादी यानी महिलाओं की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना बेमानी है।

कार्यशाला को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के सलाहकार अजीत सिंह ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ जनता का शासन जनता के द्वारा जनता के लिए होता है। चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है, लेकिन देखना यह महत्वपूर्ण है कि हम वोट किसे कर रहे हैं। यदि महिलाएं ठान लें कि वह सही व्यक्ति को चुनेंगी तो लोकतंत्र को लेकर जो सवाल खड़े किए जाते हैं, वह स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सही और ईमानदार लोगों की कमी नहीं है, लेकिन वह जिम्मेदारी उठाने से कदम पीछे खींच लेते हैं। सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक एनआरएचएम डॉ.सुषमा दत्ता ने महिलाओं को स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। प्रगति संस्था की सचिव रेखा पुंडीर ने कहा कि पितृसत्तात्मक मानसिकता राष्ट्र के विकास में बाधक बन रही है। इस सोच को बदलने के लिए महिलाएं आगे आएं। कानूनी सलाहकार आकांक्षा चौहान ने महिलाओं से जुड़े कानूनों की जानकारी दी और लंबित महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा की।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों की ओर से लोकतंत्र में अपनी भूमिका को मजबूत बनाने को लेकर सुझाव भी दिए। प्रतिभागियों ने यह भी सुझाव दिया कि राजनीतिक दल योग्यता के आधार पर उम्मीदवार मैदान में उतारें और यह भी देखें की उनकी छवि कैसी है।

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