उत्तराखंड में धामी ही होंगे भाजपा के सेनापति, नितिन नवीन लगाएंगे सांगठनिक मुहर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे से यह स्पष्ट हो गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही पार्टी का चेहरा होंगे।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फोटो।

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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड प्रवास केवल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों तक सीमित नहीं। यह माना जा रहा है कि अपने दौरे में नितिन नवीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने के फैसले पर सांगठनिक मुहर भी लगाएंगे।
धामी को ही भाजपा का चेहरा बनाने के पीछे कई प्रमुख वजह हैं। पहला यह कि भाजपा अब उत्तराखंड में बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की राजनीति से बाहर निकलना चाहती है।
पिछले वर्षों में राज्य में कई मुख्यमंत्री बदलने से संगठन से लेकर सरकार तक अस्थिरता पैदा हुई, पार्टी अब उस दौर से आगे बढ़कर स्थिर नेतृत्व, स्थिर सरकार का संदेश देना चाहती है।
नितिन नवीन का दौरा इसी रणनीति को संगठनात्मक स्तर पर अंतिम रूप देने वाला माना जा रहा है। धामी की राजनीतिक स्वीकार्यता केवल मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं है।
भाजपा के भीतर उन्हें अब वैचारिक और चुनावी दोनों स्तरों पर उपयोगी चेहरा माना जा रहा है। समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और सख्त भू-कानून जैसे फैसलों ने धामी को भाजपा के कोर समर्थकों के बीच मजबूत पहचान दी है।
पार्टी इन फैसलों को आगामी चुनाव में वैचारिक उपलब्धि और मजबूत प्रशासन की मिसाल के तौर पर पेश करने की तैयारी में है।
भाजपा का मानना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में केवल विकास की राजनीति पर्याप्त नहीं है। यहां सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रवाद और वैचारिक स्पष्टता भी चुनावी माहौल को प्रभावित करती है।
धामी ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को इसी तरह के नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। संगठनात्मक स्तर पर भी सीएम धामी फिलहाल भाजपा के सबसे सहज विकल्प माने जा रहे हैं।
संघ और संगठन के साथ उनका तालमेल बेहतर माना जाता है। उन्होंने अब तक खुद को बड़े गुटीय विवादों से दूर रखा है, जिससे पार्टी के भीतर उनके खिलाफ कोई बड़ा विरोध सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देता। भाजपा नेतृत्व इसे उनकी बड़ी राजनीतिक ताकत मानता है।
उत्तराखंड में बड़ी संख्या युवा मतदाताओं की है। भाजपा राज्यों में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की नीति पर भी काम कर रही है, इस लिहाज से भी धामी पूरी तरह मुफीद हैं। नए जमाने की इंटरनेट मीडिया, जनसंपर्क व आक्रामक राजनीति के पैमाने पर भी धामी पूरी तरह उपयुक्त हैं।
इसलिए भाजपा धामी को ही चेहरा बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पिछले दिनों एक इंटरव्यू में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यह संकेत भी दे चुके हैं कि अगले विस. चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही पार्टी का चेहरा होंगे। राजनीतिक गलियारों में इसे धामी के नेतृत्व पर केंद्रीय सहमति के संकेत के रूप में देखा गया।
ऐसा चेहरा जो संगठन को साध कर रखे
पुष्कर सिंह धामी के चयन के पीछे एक बड़ी वजह धामी की लो-रिस्क राजनीति मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व को लगता है कि धामी वैचारिक तौर पर आक्रामक हैं, लेकिन व्यक्तिगत राजनीति के स्तर पर टकराव पैदा नहीं करते।
उत्तराखंड भाजपा लंबे समय तक खेमेबाजी और नेतृत्व संघर्ष से जूझती रही है। ऐसे में पार्टी फिलहाल ऐसा चेहरा चाहती है, जो संगठन को साध कर रखे।
दूसरी वजह धामी की चुनावी उपयोगिता है। केंद्रीय नेतृत्व को लगता है कि संगठनात्मक संतुलन, वैचारिक स्पष्टता और चुनावी उपयोगिता इन तीनों का सबसे सुरक्षित मेल धामी के चेहरे में है।
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