देहरादून स्कूल में उत्पीड़न: मां धरने पर, बेटी के मन में सवाल- क्या न्याय मांगना गलती है?
देहरादून के एक निजी स्कूल में अनुचित व्यवहार की शिकायत करने वाली 17 वर्षीय छात्रा और उसके परिवार की जिंदगी संकट में है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। मां स्कूल के गेट पर न्याय की मांग कर रही है और 17 वर्षीय बेटी घर में अपनी जिंदगी के सामान्य होने का इंतजार कर रही है। जिस उम्र में उसे स्कूल जाना, खेलना और अपने सपनों को आकार देना चाहिए, उस उम्र में वह परिवार के सामने आए संकट से जूझ रही है। उसके मन में एक ही सवाल बार-बार उठ रहा है- क्या अपने सम्मान के लिए आवाज उठाना उसकी गलती थी?
दून के निजी स्कूल में अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद छात्रा और उसके परिवार की जिंदगी बदल गई है। छात्रा ने दैनिक जागरण को लिखे एक पत्र में अपनी पीड़ा साझा की है। उसने लिखा कि वह 17 साल की है। उसने कभी नहीं सोचा था कि अपने सम्मान के लिए उठाया गया एक कदम उसके पूरे परिवार की जिंदगी को इस तरह बदल देगा। छात्रा ने खुद को एक विद्यार्थी, खिलाड़ी और लेखिका मानती हैं।
वह एक किताब लिख चुकी है और दूसरी पर काम करना चाहती है। खेल के मैदान में लौटना और पढ़ाई जारी रखना भी उसके सपनों का हिस्सा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उसकी इन गतिविधियों को प्रभावित किया है। परिवार की बदली दिनचर्या और मां के संघर्ष का असर भी उसके मन पर पड़ रहा है। उसने लिखा है, ''''मैं अब भी पढ़ना चाहती हूं, खेलना चाहती हूं और किताबें लिखना चाहती हूं।
मैं चाहती हूं कि मेरा भाई भी अपनी सामान्य जिंदगी में लौटे और मेरी मां को घर में सुकून मिले।'''' यह सवाल उठाया है कि क्या न्याय मांगने का मतलब अपनी पढ़ाई, बचपन, सपनों और परिवार की खुशियों को रोक देना है? उसके लिए यह लड़ाई केवल एक शिकायत या कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब वह अपनी सामान्य जिंदगी में लौटने की उम्मीद भी लगाए बैठी है।
मां का सवाल, बच्चे पढ़ाई से महरूम क्यों?
निजी स्कूल में छात्रा से छेड़खानी के मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी न होने से नाराज पीड़िता की मां का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। उन्हें संयुक्त नागरिक संगठन, नेशनल एसोसिएशन फार पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स, बजरंग दल व अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने अपना समर्थन दिया।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ प्रधानाचार्य से मिलने का प्रयास किया, पर उन्हें मिलने नहीं दिया गया। पीड़िता की मां का कहना है कि शिक्षक, स्कूल प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। पीड़िता के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं, इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उलटा उनके बच्चे पढ़ाई से महरूम हो गए हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग, शिक्षा विभाग सहित किसी अन्य ने उनसे कोई संपर्क अब तक नहीं किया है।
शिक्षक की गिरफ्तारी की मांग
छात्रा के उत्पीड़न के मामले में आरोपित शिक्षक की गिरफ्तारी और जांच में तेजी लाने की मांग को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को सचिव गृह शैलेश बगौली से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपकर जल्द पूरी कराने की मांग की।
सचिव गृह ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। संगठन के अनुसार स्कूल में 11वीं की छात्रा के उत्पीड़न के मामले में 24 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। स्कूल प्रबंधन आरोपित शिक्षक को सेवा से हटा चुका है, लेकिन अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। संगठन ने पुलिस जांच की धीमी गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाक्सो एक्ट से जुड़े मामले में अब तक गिरफ्तारी न होना चिंताजनक है।
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