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साइबर ठगी के विरुद्ध देहरादून पुलिस बनेगी वरिष्ठ नागरिकों की 'ढाल', घर-घर जाकर देगी डिजिटल अरेस्ट की जानकारी

Published: Mon, 09 Feb 2026 06:55 AM (IST)

देहरादून पुलिस वरिष्ठ नागरिकों को 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी से बचाने के लिए सक्रिय है। एसएसपी अजय सिंह ने सीनियर ...और पढ़ें

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सोबन सिंह गुसांई, जागरण देहरादून। नए साल में साइबर अपराधी वरिष्ठ नागरिकों पर कहर बनकर टूटे। अपराधियों ने वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट किया और रकम हड़पने के साथ-साथ उन्हें इतना प्रताड़ित किया कि वह तनाव में चले गए। तमाम जागरूकता अभियान के बावजूद जब यह सिलसिला नहीं रुक रहा है तो देहरादून पुलिस साइबर ठगों के खिलाफ वरिष्ठ नागरिकों की ढाल बन रही है।

एसएसपी अजय सिंह ने सीनियर सिटीजन सेल व थानाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि जनपद में अकेले रह रहे एक-एक वरिष्ठ नागरिक के घर-घर जाकर व फोन पर डिजिटल अरेस्ट के बारे में जानकारी दें, ताकि भविष्य में उनके पास कोई ठगी के लिए फोन आता है तो वह पहले ही सचेत रह सकें।

साइबर ठग खासतौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं जोकि तकनीक से पूरी तरह से परिचित नहीं होते या सरकारी एजेंसियों के नाम पर आने वाले काल से घबरा जाते हैं। वर्ष 2026 में जनवरी के अंदर ही डिजिटल अरेस्ट के 18 मामले सामने आ चुके हैं, इनमें से 80 प्रतिशत केसों में वरिष्ठ नागरिक ही ठगी के शिकार हुए हैं।

यह वरिष्ठ नागरिक वह हैं जोकि अकेले रहते हैं। साइबर अपराधी इसी का फायदा उठाकर उन्हें कई-कई दिनों तक डरा धमकाकर घर के अंदर ही डिजिटल अरेस्ट करके रखते हैं। जब तक उन्हें ठगी का एहसास होता है तब तक साइबर ठग उनकी पूरी जमापूंजी लूट चुके होते हैं।

जनपद में अकेले रह रहे हैं 453 वरिष्ठ नागरिक

मौजूदा समय में जनपद में 453 ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जोकि अकेले जीवन जी रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनके बच्चे बाहर रहते हैं। ऐसे में पुलिस कार्यालय में बनाए गए सीनियर सिटीजन सेल से उन्हें फोन के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट के बारे में बताया जा रहा है कि किस तरह से साइबर अपराधी ठगी का जाल बुनते हैं।

किस तरह से उन्हें ऐसे लोगों से बचना है। इसके अलावा एसएसपी ने सभी थानाध्यक्षों को भी निर्देश दिए हैं कि वह एकल रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के घर-घर जाकर वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट होने से बचने की जानकारी देंगे। सभी वरिष्ठ नागरिकों को थानों व कंट्रोल रूम के नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में वह तत्काल शिकायत कर सकें।

लाखों की हुई ठगी, तनाव में चले गए बुजुर्ग

केस-1

सहस्त्रधारा रोड निवासी पंकज कुमार पत्नी के साथ निवास करते हैं जबकि उनका बेटा विदेश में रहता है। 07 दिसंबर को उन्हें अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई का अधिकारी बताया। कहा कि आपका एक मामला क्राइम ब्रांच मुंबई में दर्ज है। उनके बैंक खाते नरेश गोयल और जेट एयरवेज से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले से संबंधित हैं।ठग उन्हें लगातार उन्हें धमकी देते रहे और कहा कि आपको डिजिटल अरेस्ट किया गया है। उन्हें 06 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा और 12.80 लाख रुपये अपने विभिन्न खातों में मंगवा लिए।

केस 2

तपोवन रायपुर निवासी राजकुमार को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर खुद को बीएसएनएल कर्मचारी बताया और नंबर बंद करने की बात कही। इसके बाद काल को दूसरे व्यक्ति से जोड़ा गया, जिसने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर कैनरा बैंक में खाता खोलकर मनी लान्ड्रिंग की गई है। बताया कि मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। आरोपितों ने खुद को सीबीआइ अधिकारी व साइबर क्राइम डिपार्टमेंट मुंबई से बताया। 15 दिन तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके रखा और विभिन्न खातों में 68 लाख रुपये ट्रांसफर करा दिए।


डिजिटल अरेस्ट के शिकार अधिकतर वह वरिष्ठ नागरिक हो रहे हैं जिनका किसी से संवाद नहीं होता। बढ़ते मामलों को देखते हुए सीनियर सिटीजन सेल व थानाध्यक्षों को अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट से बचने के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ नागरिक पहले से ही जागरूक होंगे तो वह साइबर अपराधियों के चुंगल में आने से बच सकेंगे।

                                                                            अजय सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून

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