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नोएडा की नौकरी छोड़कर देहरादून में खोला सेंटर, विदेशी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश

Published: Tue, 13 Oct 2026 11:07 PM (IST)

देहरादून पुलिस ने राजपुर में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी ...और पढ़ें

राजपुर थाना पुलिस की ओर से फर्जी काल सेंटर से गिरफ्तार आरोपित।

राजपुर थाना पुलिस की ओर से फर्जी काल सेंटर से गिरफ्तार आरोपित।

HighLights

  1. देहरादून में फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने किया भंडाफोड़।

  2. पांच आरोपी विदेशी नागरिकों से एंटीवायरस ऐप के नाम पर ठगी करते थे।

  3. ठगी के लिए गिफ्ट कार्ड का इस्तेमाल कर चीनी नागरिकों को बेचते थे।

जागरण संवाददाता, देहरादून। दून में कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का राजपुर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजपुर में अवैध रूप से चल रहे कॉल सेंटर में दबिश देकर पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित मोबाइल और लैपटाप में एंटीवायरस एप को बेचने के नाम पर विदेशी नागरिकों से ठगी करते थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि राजपुर क्षेत्र में अवैध कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों के साथ ठगी किए जाने की जानकारी मिली। राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट को गहनता से जांच कर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। सोमवार देर रात तीन अलग-अलग टीमों ने आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड पर अवैध कॉल सेंटर पर दबिश दी।

कॉल सेंटर में काम कर रहे कुछ युवक पुलिस को देखकर फरार हो गए। पुलिस टीम ने मौके से कॉल सेंटर संचालित कर रहे मुख्य सरगना मोरिवाड़ा सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश निवासी आशीष नगर सहित शाहखाकी चौक सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश निवासी अक्षत शर्मा, अनूपनगर फाजलपुर मेरठ उतर प्रदेश निवासी अंशु मुद्गल, सिलवारा रोड सिविल लाइन जिला सुलतानपुर उत्तर प्रदेश निवासी राज सिंह और शास्त्री नगर जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश निवासी अभिनव सिंह को गिरफ्तार किया। उनके पास से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटाप, एक आइपैड व ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अन्य उपकरण बरामद हुए।

नोएडा से शुरू किया काम, देहरादून में खोला सेंटर

मुख्य सरगना आशीष नगर ने बताया गया कि वह पहले नोएडा स्थित एक कॉल सेंटर में काम करता था, जहां वह विदेशी नागरिको को कॉल कर इसी प्रकार धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम देता था। तीन माह पूर्व वह नौकरी को छोड़कर देहरादून आ गया और देहरादून में अलग-अलग जगहों पर काम करने लगा।

ट्रू कॉलर में बास नाम से सेव किया था अपना नंबर

आशीष नगर ने बताया कि उसने अपने मोबाइल नंबर को ट्रू कॉलर पर बास नाम से सेव किया था। उसने विदेशी नागरिकों के करीब 5000 मोबाइल नंबर खरीदे थे, जिन्हें वह स्वयं व अपने साथियों के माध्यम से गूगल वाइस एप के माध्यम से कॉल कर उनके फोन में खराबी होने तथा उसे ठीक करने के एवज में मोबाइल पर अवास्ट एंटीवायरस एप डाउनलोड करने की जानकारी देते थे। एप को उन्हें देने के एवज में उनसे 100 डॉलर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे। गिफ्ट कार्ड व पेमेंट मिलने के बाद वह केवल 10 प्रतिशत ग्राहकों को ही एंटीवायरस एप उपलब्ध कराते थे।

चाइनीज नागरिकों को बेच रहे थे गिफ्ट कार्ड

जांच में यह बात भी सामने आई है कि विदेशी नागरिकों से मिलने वाले गिफ्ट कार्ड को वह चाइनीज नागरिकों को बेच देते थे। गिफ्ट कार्ड के एवज में चाइनीज भी उनके खातों में पैसा डालते थे। कॉल सेंटर से वह अधिकतर अमेरिका व कनाडा के नागरिकों से ठगी करते हैं। कॉल सेंटर कुछ दिन चलाने के बाद वह पुलिस कार्रवाई के डर से बदल देते थे।

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