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देहरादून में रह रहा था झारखंड का कुख्यात गैंग्स्टर, पुलिस को नहीं थी भनक

Published: Fri, 13 Feb 2026 11:22 PM (GMT+05:30)

देहरादून में कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या ने पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर की है। 50 से अधिक गंभीर ...और पढ़ें

देहरादून में हुए गोलीकांड की जांच करने पहुंचे आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप साथ में एसएसपी अजय कुमार आदि। जागरण

देहरादून में हुए गोलीकांड की जांच करने पहुंचे आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप साथ में एसएसपी अजय कुमार आदि। जागरण

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जागरण संवाददाता, देहरादून। अपराधियों के प्रति उत्तराखंड पुलिस का रवैया कैसा है, इसका अंदाजा शुक्रवार को हुई गैंग्स्टर की हत्या की घटना से लगाया जा सकता है।

जिस अपराधी के विरुद्ध हत्या, रंगदारी, हत्या का प्रयास, घर के बाहर फायरिंग जैसे गंभीर अपराध में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हों और उसके बारे में दून पुलिस को कानों-कान खबर न रहे, इससे बड़ी लापरवाही क्या हो सकती है।

गैंग्स्टर विक्रम शर्मा लंबे समय से ग्रीन व्यू रेजीडेंसी अमन विहार रायपुर क्षेत्र में रह रहा था, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

विक्रम का बाजपुर में स्टोन क्रशर है। गैंग्स्टर को स्टोन क्रशर का लाइसेंस किस तरह मिला, यह भी बड़ा जांच का विषय है। स्टोन क्रशर लगाने के लिए काफी जमीन की जरूरत होती है और स्टोन क्रशर का लाइसेंस आपराधिक प्रवृति के व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।

विक्रम के पास एक पिस्टल भी थी, जिसे वह हर समय साथ में रखता था। संगीन अपराधों में शामिल गैंग्स्टर की जानकारी पुलिस को नहीं लग पाई, इससे खुफिया तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बेखौफ अपराधी खुलेआम दे रहे घटनाओं को अंजाम

अपराधियों के मन में उत्तराखंड पुलिस का भय नहीं रहा। यही कारण है कि वह खुलेआम हत्या की घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती दे रहे हैं।

तिब्बती मार्केट में शूटरों ने सरेआम भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना को हुए 48 घंटे भी नहीं हुए थे कि अब शहर के सबसे पाश एरिया सिल्वर सिटी में बेखौफ बदमाश बाइक पर आए और गैंग्स्टर को गोलियों से भूनकर फरार हो गए।

बिना नंबर प्लेट वाहनों पर नहीं कसी जा रही नकेल

पुलिस बिना नंबर प्लेट लगे वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इसी का नतीजा है कि अपराधी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए बिना नंबर प्लेट के वाहन को इस्तेमाल करते हैं, ताकि यदि उसकी फुटेज सीसीटीवी कैमरे में आ भी जाए तो पुलिस उन्हें इतनी जल्द पकड़ नहीं सकती।

पुलिस केवल बिना हेलमेट पहने वाहन चालकों को रोककर उनका चालान करके खानापूर्ति कर रही है।

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