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देहरादून की शांत वादियों में महिला अपराधों का बढ़ता ग्राफ, कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल

Published: Tue, 03 Feb 2026 08:36 PM (IST)

देहरादून में एक युवती की दिनदहाड़े हत्या ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि पीड़िता ने ...और पढ़ें

मच्छी बाजार स्थित दूल्हा बाजार में सोमवार को युवती की हत्या की घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसपी सिटी प्रमोद कुमार व अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी।

मच्छी बाजार स्थित दूल्हा बाजार में सोमवार को युवती की हत्या की घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसपी सिटी प्रमोद कुमार व अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मचारी।

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संक्षेप में पढ़ें

विजय जोशी, जागरण देहरादून। राजधानी देहरादून में महिला अपराधों की बढ़ती घटनाओं ने न केवल आमजन को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिले में हाल के दिनों में हुई हत्या की वारदातों से सनसनी फैली हुई है। महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

ताजा मामला शहर के व्यस्ततम मछली बाजार क्षेत्र का है, जहां दिनदहाड़े एक युवती की चापड़ से गला काटकर हत्या कर दी गई। यह घटना इसलिए भी अधिक चिंताजनक है क्योंकि मृतका ने घटना से महज दो दिन पहले ही आरोपित के खिलाफ धमकी देने की शिकायत पुलिस चौकी में दी थी।

इसके बावजूद पुलिस समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी, जिसका परिणाम एक जघन्य हत्या के रूप में सामने आया। इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सवाल उठ रहे हैं कि जब पीड़िता ने पहले ही खतरे की आशंका जताई थी, तो आरोपित पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या धमकी की शिकायतों को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही? यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद एक युवती की जान बचाई जा सकती थी।

विपक्षी दलों ने महिला सुरक्षा पर सरकार को घेरा

महिला अपराधों को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व विधायक राजकुमार समेत तमाम कांग्रेसियों का आरोप है कि देहरादून में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

नेताओं का कहना है कि राजधानी में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रदेश के अन्य इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। व्यापारी वर्ग में भी इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है।

भरे बाजार में दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। व्यापारी सुनील कुमार बांगा का कहना है कि बाजारों में पुलिस गश्त न के बराबर है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने बाजार क्षेत्रों में स्थायी पुलिस चौकी, सीसीटीवी निगरानी और नियमित गश्त की मांग की है।

बढ़ रहा महिला अपराध का ग्राफ, पुलिस के दावे उलट

गौरतलब है कि देहरादून में हाल के महीनों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, धमकी, घरेलू हिंसा और हत्या जैसे मामलों में इजाफा देखा गया है।

बावजूद इसके, कई मामलों में पीड़िताओं की शिकायतों पर पुलिस की ढिलाई सामने आ रही है, जो चिंता का विषय है। बीते एक सप्ताह के भीतर जिले में हुई तीन महिलाओं की हत्याओं से दूनवासी पुलिस की ओर असुरक्षा के भाव से देख रहे हैं।

उत्तराखंड में महिला अपराधों की भयावह सच्चाई

पहाड़ों की शांत वादियों और देवभूमि की पहचान के बीच महिला अपराधों का एक ऐसा अंधेरा आंकड़ों में दर्ज है, जो न केवल डराता है बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करता है।

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय से कुछ माह पूर्व प्राप्त आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि राज्य में महिला अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे, बल्कि हर साल नए रिकार्ड बना रहे हैं।

तीन साल में 1822 दुष्कर्म, 1796 अपहरण दर्ज

  • साल 2021 से 2023 के बीच उत्तराखंड में 1822 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ। इसी अवधि में 1796 महिलाओं का अपहरण दर्ज किया गया। ये आंकड़े केवल अपराध नहीं, बल्कि राज्य में महिलाओं की असुरक्षा की गवाही हैं।

पांच साल में 10500 महिलाएं और बालिकाएं गुमशुदा

  • उत्तराखंड में पिछले पांच सालों में 10500 महिलाएं और बालिकाएं गुमशुदा हुईं। पुलिस इनमें से 9733 को ढूंढने में सफल रही, लेकिन 757 महिलाएं आज भी लापता हैं।

वर्षवार गुमशुदगी की तस्वीर

  • 2021: गुमशुदा 1494 महिलाओं व 404 बालिकाओं में से 62 महिलाएं और छह बालिकाएं आज भी लापता।
  • 2022: गुमशुदा 1632 महिलाओं व 425 बालिकाओं में से 79 महिलाएं और आठ बालिकाएं अब तक नहीं मिलीं।
  • 2023: गुमशुदा 1764 महिलाओं व 716 बालिकाओं में से 75 महिलाएं और नौ बालिकाएं आज भी लापता।
  • 2024: गुमशुदा 1953 महिलाओं व 838 बालिकाओं में से 153 महिलाएं और 25 बालिकाएं आज भी गायब।

पांच साल में 318 अज्ञात महिला शव, 231 की आज भी पहचान नहीं

  • उत्तराखंड में महिला अपराध की सबसे डरावनी परत अज्ञात महिला शवों से जुड़ी है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में 318 महिलाओं के शव बरामद हुए, लेकिन इनमें से केवल 87 की पहचान हो सकी। 231 महिलाएं आज भी सिर्फ अज्ञात शव हैं।

वर्षवार अज्ञात शवों की स्थिति

  • 2021: 74 शव, केवल 27 की पहचान
  • 2022: 50 शव, 17 की पहचान
  • 2023: 77 शव, 18 की पहचान
  • 2024: 88 शव, 19 की पहचान
  • 2025: 29 शव, सिर्फ छह की पहचान

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