यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड पुलिस में लगातार बढ़ रहा भ्रष्टाचार, ये हम नहीं आंकड़े कह रहे हैं; देखिए
उत्तराखंड में पिछले नौ महीने का ही रिकार्ड देखा जाए तो उत्तराखंड में 253 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका ...और पढ़ें

सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। पुलिस में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है। यह हम नहीं बल्कि आंकड़े कह रहे हैं। पिछले नौ महीने का ही रिकार्ड देखें तो उत्तराखंड में 253 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। वहीं, दो को बर्खास्त तक करना पड़ा है। इनमें अधिकतर कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामलों में हुई हैं।
एक साल पहले पुलिस महानिदेशक का पद संभालने के बाद डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिसकर्मियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया था। डीजीपी ने समय-समय पर पुलिसकर्मियों को सम्मेलन में भ्रष्टाचारमुक्त पुलिसिंग का संदेश दिया, लेकिन इस दिशा में सुधार कम ही देखने को मिला। अक्टूबर महीने में ही भ्रष्टाचार के मामले में तीन पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं। इनमें धर्मावाला चौकी के इंचार्ज दीपक मैठाणी, कांस्टेबल त्रेपन सिंह और कोतवाली डोईवाला के कांस्टेबल स्वप्निल ऋषि शामिल हैं। जबकि राजपुर क्षेत्र में व्यापारी को गोली मारने पर पीएसी के एक जवान को जेल जाना पड़ा है।
नौ महीने में खाकी पर कार्रवाई
लाइन हाजिर 14
निलंबित 253
बर्खास्त 02
लंबित जांच 292
14(1) 52
(जांच चल रही है। मामले में कई बर्खास्त भी हो सकते हैं)
14(2) 191
(बेड एंट्री)
कुछ ट्रेनी सीओ पर भी मिलीभगत के आरोप
जिले में कुछ ट्रेनी सीओ पर भी खनन और भूमाफिया के साथ मिलीभगत के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि ट्रेनी सीओ ने होटलों में खनन और भूमाफिया के साथ कई बार बैठक कर चुके हैं। इसकी सूचना जब पुलिस महानिदेशक तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी किए कि ट्रेनी सीओ को अनुशासन और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया जाए, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड अशोक कुमार ने बताया कि भ्रष्टाचार किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस पुलिसकर्मी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही हैं, उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई जा रही है।
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