देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की मुलाकात का कार्यक्रम तकरीबन तय हो गया है। राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना के मद्देनजर इस मुलाकात के सियासी निहितार्थ भी हैं। इसे प्रधानमंत्री की सहमति लेने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री आगामी अप्रैल माह के तीसरे हफ्ते में राज्य में प्रस्तावित वेलनेस समिट के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री को न्योता भी देंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शुक्रवार से दिल्ली दौरे पर हैं। राज्य की विकास योजनाओं को लेकर उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मुलाकात करीब-करीब तय हो चुकी है। सूबे में सत्ताधारी दल भाजपा के भीतर नए सियासी घटनाक्रम के बाद इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। 

लंबी मशक्कत के बाद प्रदेश भाजपा की कमान वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत को सौंपी जा चुकी है। भाजपा के भीतर तेजी से बदले सियासी परिदृश्य में भगत की ताजपोशी ने नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की मुलाकात हुई थी। माना जा रहा है कि दोनों के बीच मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी बातचीत हुई। 

हालांकि, प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात का एजेंडा राज्य के विकास पर ही मुख्य रूप से केंद्रित है। मुख्यमंत्री वेलनेस समिट के साथ में प्रधानमंत्री के राज्य में ड्रीम प्रोजेक्ट क्लीन गंगा, केदारनाथ समेत चार धामों की व्यवस्था, राज्य के नए देवस्थानम प्रबंधन एक्ट के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानकारी देंगे। बीते वर्ष हुए इन्वेस्टर्स समिट के फीडबैक का अपडेट प्रधानमंत्री को दिया जाएगा।

आजीविका को पूर्वोत्तर की तर्ज पर मिले पैकेज

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर उत्तराखंड ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए पूर्वोत्तर की तर्ज पर विशेष पैकेज मांगा। उन्होंने कहा कि इस पैकेज के बूते पर्वतीय व सीमांत जिलों से पलायन रोकने को स्थानीय स्तर पर आजीविका क्रियाकलापों को मजबूत किया जा सकेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट आवंटन में निर्धनता के अनुपात के साथ ही पलायन की समस्या को आधार के रूप में लिया जाना चाहिए। राज्य में आजीविका मिशन के तहत 13 जिलों के 95 ब्लॉकों में कार्य किया जा रहा है। इस कार्य को अंजाम देने को स्वयं सहायता समूहों व उच्चस्तरीय संगठनों का गठन हो चुका है। 

16422 समूहों की सूक्ष्म ऋण योजना तैयार कर उन्हें आजीविका गतिविधियों से जोडऩे के लिए बैंकों से कर्ज दिलाया गया है। इस योजना में 65 प्रकार की आजीविका बढ़ाने वाली गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मिशन संचालन को सभी ब्लॉकों में 407 पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर कार्यरत लोगों को मानदेय पर सालाना 11 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चालू वित्त वर्ष में 95.72 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। 

इसमें से 40.95 करोड़ की राशि जारी किए जाने को मंजूरी दी जा चुकी है। राज्य को कुल 10696.72 लाख धनराशि की जरूरत है। उन्होंने पीएमजीएसवाइ-फेज एक के तहत केंद्र सरकार अनुमोदित कोर नेटवर्क में प्रस्तावित मार्गों में से स्वीकृत, निर्मित व निर्माणाधीन 299.98 करोड़ लागत के 139 सेतुओं के निर्माण को कार्यवाही का अनुरोध किया। 

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केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए प्रकरण का परीक्षण कराने को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। पीएमजीएसवाइ स्टेज-दो के तहत 529.42 करोड़ लागत के 121 मार्गों के पक्कीकरण के लंबित प्रकरण पर कार्यवाही का अनुरोध भी उन्होंने किया।

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