जागरण संवाददाता, देहरादून: शहर में इलेक्ट्रिक बसों के सड़क पर उतरने के बाद से ही सिटी बस सेवा महासंघ इनका विरोध कर रहा है। शनिवार को सहस्रधारा रोड पर राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में सिटी बस संचालकों ने इलेक्ट्रिक स्मार्ट बसों को लेकर न केवल आपत्ति दर्ज कराई बल्कि ये आरोप भी लगाया कि सरकार सिटी बस के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है। इसके साथ ही परिवहन मुख्यालय पर संचालकों ने प्रदर्शन भी किया।

इलेक्ट्रिक बसों का किराया दस रूपये है जबकि सिटी बस में स्लैब निर्धारित होने के कारण यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को आर्थिक दृष्टि के साथ ही सफर के लिहाज से लाभ वाली लग रहीं। ऐसे में सिटी बस महासंघ ने विरोध के सुर तेज कर दिए हैं। शनिवार को राज्य परिवहन प्राधिकरण के समक्ष दून सिटी बस सेवा महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल व अन्य पदाधिकारियों की ओर से किराये पर आपत्ति जताई। परिवहन मुख्यालय में प्रदर्शन करते हुए डंडरियाल ने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए कोई परमिट नहीं है। आरोप है कि परिवहन निगम बिना परमिट के बगैर इन्हें सिटी बस के मार्गों पर कैसे चला रहा। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि लगभग एक करोड़ रुपये की इलेक्ट्रिक बस का किराया इतना कम क्यों रखा गया और यह कैसे लाभ में चलेगी।

ट्रांसपोर्टरों ने स्मार्ट सिटी लिमिटेड अध्यक्ष समेत प्राधिकरण के अध्यक्ष को आपस में समन्वय स्थापित कर इलेक्ट्रिक स्मार्ट बसों का किराया व मार्ग तय करने की मांग की। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों ने इलेक्ट्रिक बसों के लिए एक निश्चित किराया तय करने की मांग की, ताकि सिटी बसों पर इसका असर न पड़े।

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इंप्लाइज यूनियन का आंदोलन टला

कुमाऊं में आई आपदा को देखते हुए रोडवेज इंप्लाइज यूनियन ने रविवार की मध्य रात्रि से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार स्थगित कर दिया है। यूनियन के प्रदेश महामंत्री रविनंदन कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर यूनियन ने गत माह आंदोलन का नोटिस दिया था। इस क्रम में 24 अक्टूबर की मध्य रात्रि से नैनीताल मंडल के अल्मोड़ा डिपो में और 27 अक्टूबर की मध्य रात्रि से टनकपुर मंडल के पिथौरागढ़ डिपो में 24 घंटे का कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई थी। पिछले दिनों कुमाऊं मंडल में आई आपदा के कारण यूनियन ने जनहित में अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है।

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Edited By: Sumit Kumar