देहरादून, केदार दत्त। घायल और बीमार वन्यजीवों की जान बचाने के मकसद से हरिद्वार के चिड़ियापुर में आठ साल से बगैर अनुमति के चल रहा रेसक्यू सेंटर अब 'मिनी जू' में तब्दील होगा। इस प्रकार के रेसक्यू सेंटर के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की अनुमति आवश्यक होती है। इसे लेकर जब वन महकमे की कार्यशैली पर सवाल उठे तो अब जाकर इसकी कवायद तेज की गई है। चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर में जुटाई जा चुकी सुविधाओं को देखते हुए सीजेडए ने इसे मिनी जू में तब्दील करने का निर्देश दिया है। विभाग इसका प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है। साथ ही वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत सीजेडए में दस्तक देने जा रहे हैं। 

वन्यजीव विविधता वाले उत्तराखंड में बीमार और घायल जंगली जानवरों को उपचार मुहैया कराने के मकसद से वर्ष 2009 में रेसक्यू सेंटर खोलने का तत्कालीन सरकार ने निर्णय लिया। राजाजी टाइगर रिजर्व से लगे हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में 35 हेक्टेयर भूमि इसके लिए चयनित की गई। 2009 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसके तहत 25 हेक्टेयर क्षेत्र में रेसक्यू सेंटर और 10 हेक्टेयर में पौधरोपण का निर्णय लिया गया। दो साल बाद 2011 में यह रेसक्यू सेंटर तैयार हुआ। सेंटर में बाघ, गुलदार के बाड़े, बंदरबाड़ा, जंगली जानवरों के उपचार के लिए छोटा अस्पताल समेत अन्य सुविधाएं जुटाई गई। यही नहीं, मॉनीटरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। 

वहां बंदरों के बंध्याकरण से लेकर रेसक्यू कर लाए गए घायल और बीमार कई जानवरों को उपचार दिया जा चुका है। कुछ समय पूर्व वहां उपचार के दौरान एक-दो जानवरों की मौत के बाद चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर की वैधता पर सवाल उठे। बात सामने आई कि इस प्रकार के रेसक्यू सेंटर के लिए सीजेडए से अनुमति लेना आवश्यक है, जो चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर के लिए नहीं ली गई। इसे लेकर छीछालेदर के बाद सीजेडए से आवेदन किया गया तो सीजेडए ने कुछ आपत्तियां लगाई। साथ ही इस सेंटर को मिनी जू के रूप में विकसित करने के मद्देनजर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। हरिद्वार के डीएफओ आकाश वर्मा के मुताबिक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसे सीजेडए को भेजा जाएगा। 

वन और पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि यह सही है कि चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर को सीजेडए से अनुमति नहीं मिल पाई है। इसके क्या कारण रहे, मैं इसकी तह में नहीं जाना चाहता। मौजूदा सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। अब सीजेडए के सुझाव के अनुसार इस रेसक्यू सेंटर को मिनी जू के रूप में तब्दील करने पर फोकस है। मैं जल्द ही दिल्ली में सीजेडए के अधिकारियों से भी मुलाकात करूंगा। कोशिश है कि जल्द से जल्द यह मिनी जू अस्तित्व में आ जाए।

वर्तमान में रह रहे सात गुलदार 

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से रेसक्यू कर लाए गए सात गुलदार वर्तमान में चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर में रह रहे हैं। पूर्व में कुछेक गुलदारों के स्वस्थ होने पर इन्हें जंगल में छोड़ा जा चुका है। बंदरों का बंध्याकरण भी इस सेंटर में हो रहा है। मिनी जू बनने से होगा फायदा चिड़ियापुर रेसक्यू सेंटर के मिनी जू में तब्दील होने से वहां अन्य वन्यजीवों को भी रखा जा सकेगा। साथ ही घायल और बीमार जानवरों को और बेहतर ढंग से उपचार मिलेगा। मिनी जू के पर्यटकों के लिए खुलने पर यह आय का साधन भी बनेगा।

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