जागरण संवाददाता, देहरादून: लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी, मसूरी से पकड़ी गई फर्जी आइएएस रूबी चौधरी पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) मनींद्र मोहन पांडेय की अदालत में आरोप तय कर दिए गए। इसी के साथ मंगलवार से केस का ट्रायल भी शुरू हो गया। पुलिस की ओर से पेश की गई चार्जशीट में कुल 104 गवाह बनाए गए हैं। जिनके अब बयान दर्ज होंगे। वहीं मंगलवार को ही रूबी चौधरी के एक जमानती ने भी अपनी जमानत वापस ली है। जिसके बाद रूबी को दूसरा जमानती पेश करना पड़ा। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी। रूबी चौधरी का प्रकरण अप्रैल 2015 में सामने आने के बाद दून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया था। आरोप था कि मुजफ्फरनगर की रहने वाली रूबी चौधरी करीब छह महीने तक फर्जी प्रशिक्षु बनकर अकादमी में रहती रही। मामले में एलबीएस अकादमी प्रशासन की तहरीर पर मसूरी कोतवाली में रूबी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत चार धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद दो दिन बाद रूबी के गिरफ्तार होने पर मामला देश भर में कई हफ्ते तक सुर्खियों में बना रहा। हालांकि, बाद में उसे जमानत मिल गई। पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल करने के बाद आरोप तय करने के लिए कोर्ट से रूबी को कई समन भी जारी हुए, लेकिन वह पेश नहीं हुई। लिहाजा कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। तब रूबी बीते 18 अप्रैल को कोर्ट में पेश हुई। रूबी के अधिवक्ता अरुण खन्ना ने बताया कि पेश होने पर रूबी ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद उस पर लगाए गए आरोपों पर सुनवाई शुरू हुई। जिसके बाद अब उस पर आरोप तय कर दिए गए हैं।