विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चारधाम मार्ग में भूस्खलन निगरानी प्रणाली विकसित करने पर हो रहा अध्ययन, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दी जानकारी

Published: Thu, 26 Mar 2026 09:22 PM (IST)

केंद्र सरकार चारधाम यात्रा मार्ग पर भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने का अध्ययन कर रही है।

बीते दिनों बदरीनाथ हाईवे गोविंदघाट पिनोला के पास पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गया था। वहीं, ज्योतिर्मठ नीति मलारी हाईवे सलधार के पास बोल्डर गिरा।

बीते दिनों बदरीनाथ हाईवे गोविंदघाट पिनोला के पास पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गया था। वहीं, ज्योतिर्मठ नीति मलारी हाईवे सलधार के पास बोल्डर गिरा।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, देहरादून। केंद्र सरकार चारधाम यात्रा (Char dham Yatra) मार्ग में भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर अध्ययन कर रही है। राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई।

एनएच को लेकर मांगी जानकारी के जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बताया कि उत्तराखंड स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों में प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ तालमेल कर कार्य किए जा रहे हैं।

पहाडी राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों एनएच सहित राष्ट्रीय राजमार्गों के आपदा रोधी अवसंरचना के विकास के लिए विभिन्न प्रयास किए गए हैं।

जिनमें पर्वतीय ढलानों की अस्थिरता के आकलन, निगरानी के लिए आइआइटी रुड़की के माध्यम से पहल की गई है।

उत्तराखंड के चारधाम तीर्थयात्रा मार्ग के 100 किलोमीटर लंबे खंड के साथ इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार आधारित भूस्खलन निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अध्ययन पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन से निपटने के विशेष उपाय के लिए टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन इंडिया लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इसी तरह पर्वतीय क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सड़क निर्माण कार्यों से पहले ढलान काटने और स्थिरीकरण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर भू-खतरों के शमन उपायों के तकनीकी सहयोग हेतु रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के साथ समझौता किया गया है।

सुरंगों की भूवैज्ञानिक जांच और भू-खतरों के अध्ययन के लिए डेटा साझा करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ काम किया जा रहा है।

सुरंग परियोजनाओं, सड़क परियोजनाओं आदि के लिए भू-तकनीकी जांच पड़ताल, डीपीआर, निर्माण चरण के दौरान सुरंग के डिजाइन और रेखाचित्रों (ड्राइंग) की समीक्षा, प्रूफ चेक किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- चमोली: भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे 8 घंटे बंद, नीति-मलारी मार्ग भी रहा बाधित

यह भी पढ़ें- कुल्लू में भूस्खलन और भारी बारिश से बिगड़े हालात, कई घर कराए गए खाली; 13 सड़कें बंद