संवाद सूत्र, साहिया: गुरुवार को जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में सूर्य की संक्रांति मनाई गई। प्रत्येक गांव के घर-घर में मंडुवे के आटे से विशेष व्यंजन पिनवे व उलवे बनाए गए, जिन्हें मेहमाननवाजी के दौरान परोसा गया। पिनवे व उलवे व्यंजन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माने जाते हैं, इसलिए कोरोना काल में व्यंजन का महत्व और अधिक बढ़ गया। सूर्य की संक्रांति को विशेष व्यंजन बनाने को शुभ मानते हुए महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया।

जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में हर साल परंपरागत तरीके से संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य की संक्रांति पर घर-घर में बनाए गए पिनवे को घी व घुटी शक्कर के साथ खाया जाता है, जबकि उलवे को देशी घी के साथ सेवन किया जाता है। दोनों की व्यंजन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व बदलते मौसम में स्वस्थ रखने का काम करते हैं। संक्रांति पर शाम को उड़द की दाल की खिचड़ी का आनंद लिया। यह परंपरा पौराणिक समय से चली आ रही है। संक्रांति को जौनसार-बावर के रीति रिवाजों से जुड़ी संस्कृति की झलक दिखती है, जिसे आज युवा पीढ़ी भूल रही है। क्षेत्रीय महिलाओं अनिता देवी, रविता देवी, झूलो देवी, सुशीला देवी, इन्द्रा देवी, सविता देवी, रामदेई देवी, कृष्णा देवी आदि का कहना है कि जौनसार-बावर में मनाई जाने वाली संक्रांति से घर में खुशहाली आती है, परिवार एकजुट रहता है। संक्रांति की शुरुआत होने पर बरसात के महीनों में मवेशियों के साथ डांडे पर गए पशुपालक भी वापस अपने घरों को लौटना शुरू कर देते हैं। डांडे से पशुपालकों के मवेशियों के साथ अपने अपने गांव आने पर भी जनजातीय क्षेत्र में समारोह आयोजित कर खुशियां मनाई जाती है।

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