जागरण संवाददाता, विकासनगर: वैसे तो विजयादशमी पर्व सभी मनाते हैं, लेकिन गोर्खाली समाज में इसे अलग ही अंदाज में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। पर्व की धूम पूरे पांच दिनों तक रहती है। 'दशैं' पर्व के रूप में मनाए जाने वाले इस त्योहार पर गोर्खाली समाज के बुजुर्ग सदस्य परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर टीका लगाते हैं और उन्हें पाप कर्मो से दूर रहने व खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं।

पछवादून के तेलपुर, डाकपत्थर, विकासनगर, बरोटीवाला, लक्ष्मीपुर, तेलपुरा-अटकफार्म, राजावाला, हरिपुर आदि क्षेत्रों में गोर्खाली समाज दशैं यानि दशहरा पर्व अपनी अलग परंपरा के अनुसार मनाता है। पांच दिन तक चलने वाले इस पर्व के तहत विविध आयोजन किये जाते हैं। पर्व के पहले दिन बुर्जगों ने अपने छोटों को विशेष टीका लगाकर आशीर्वाद दिया। सहसपुर में दशहरा पर्व मनाते हुए पूर्व प्रधान सुंदर थापा ने बताया कि गोर्खाली समाज में इस दिन दही, रोली और चावल का टीका बनाकर बुजुर्ग अपने से छोटों को लगाते हैं। माना जाता है कि ये एक तरह का आशीर्वाद स्वरूप होता है, बड़े बुजुर्गो का अपने से छोटे सदस्यों के लिए। इस दिन खासतौर से रिश्तेदार एक दूसरे के घर जाकर बधाई देते हैं और टीका लगाकर दक्षिणा के रूप में रुपये देते हैं। गोर्खाली समाज में इस दिन प्रसाद के रूप में मांस और सेल रोटी का भोग लगता है और ये माना जाता है कि जिस घर में मांस नहीं बना, उस घर में देवी का वास नामुमकिन है। दशहरा पर्व पर शांति देवी, प्रदीप गौतम, भगवान सिंह, जीवन थापा, आशा थापा, ऊषा शाह, सुंदर थापा, गौरव गौतम, गोर्खाली सुधार सभा अध्यक्ष जोगिद्र शाह, प्रेम बहादुर, अभय थापा, उज्ज्वल, आकाश, शकुंतला, शिवानी, हेमा, शशि, रेणू, मेनका आदि ने बुजुर्गो से विशेष गोर्खाली टीका लगवाया। वहीं दशहरा पर्व पर व्यक्तियों ने अपने कानों पर हरियाली लगाकर पर्व की परंपराएं निभाई।

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