देहरादून, जेएनएन। छावनी परिषदों का चुनाव छह माह के लिए टल गए हैं। मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल छह माह बढ़ा दिया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से इस बावत आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दरअसल, छावनी अधिनियम 2006 में संशोधन का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में लंबित है। माना जा रहा है कि इसके बाद ही निकट भविष्य में कैंट बोर्ड के चुनाव होंगे। 

कैंट बोर्ड में मौजूदा निर्वाचित सदस्यों का पांच वर्ष का कार्यकाल दस फरवरी को खत्म हो रहा है। नए बोर्ड गठन के लिए चुनाव को लेकर वार्डों के आरक्षण का काम भी पूरा किया जा चुका है, लेकिन अब तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है। ऐसे में मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल छह माह बढ़ा दिया गया है। 

पहले भी बढ़ाया गया है बोर्ड का कार्यकाल

ऐसा पहली मर्तबा नहीं है, जब कैंट के चुनाव छह माह के लिए टाले गए हों। इससे पूर्व रक्षा मंत्रालय वर्ष 2003 में कैंट बोर्डों का कार्यकाल को बढ़ा चुका है। उस समय छावनी परिषद का कार्यकाल 2003 में खत्म हो गया था, लेकिन रक्षा मंत्रालय की ओर से कार्यकाल दो बार छह-छह माह के लिए बढ़ा दिया था। 

इसके बाद बोर्ड का कार्यकाल 2004 तक सुचारु रूप से चला था। रक्षा मंत्रालय ने 2004 में 1924 के छावनी अधिनियम में संशोधन करते हुए वर्तमान में प्रभावी अधिनियम 2006 को संशोधनों के बाद वर्ष 2007 तक देश के समस्त छावनी परिषदों को भंग रखा था। इसके बाद वर्ष 2008 में छावनी परिषदों में नए अधिनियम से चुनाव कराए गए थे। इनका छह वर्ष का कार्यकाल 2008 से लेकर 2014 तक छह-छह माह के एक्सटेंशन मिलने के बाद पूर्ण हुआ था। 

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उपाध्यक्ष के लिए सीधा चुनाव

छावनी परिषद के चुनाव टलने का कारण उपाध्यक्ष पद के लिए सीधे चुनाव का होना है। माना जा रहा है कि चुनाव नियमावली में संशोधन के बाद उपाध्यक्ष की शक्तियां बोर्ड में बढ़ाई जा सकती हैं। अब तक उपाध्यक्ष का चुनाव जनता की ओर से निर्वाचित होकर आए सभासदों की ओर से किया जाता है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की ओर से जनता से एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव मांगे थे। जिसमें उपाध्यक्ष का वार्ड सदस्यों की भांति ही चुनाव जनता से करवाने की पुरजोर वकालत की गई थी।

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