राज्य ब्यूरो, देहरादून:

उत्तराखंड में इस साल 3514 हेक्टेयर क्षेत्र में क्षतिपूरक वनीकरण किया जाएगा। क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण (कैंपा) की स्टीय¨रग कमेटी की बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस मौके पर वर्ष 2018-19 के लिए 211.30 करोड़ की कार्ययोजना का अनुमोदन भी किया गया। साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष के अवशेष व अपूर्ण कार्याें के लिए 107 करोड़ का प्रावधान किया गया।

बैठक में मुख्य सचिव ने असिस्टेड नेचुरल रिजनरेशन पर खास बल दिया। उन्होंने कहा कि गड्ढे खोदकर पेड़ लगाने की बजाए प्राकृतिक पुनरोत्पादन किया जाए। यही नहीं, बाजार की मांग के अनुसार क्लस्टर आधार पर पौधरोपण किया जाना चाहिए। उन्होंने चुलू, रीठा, दाड़िम, तिमला, तेजपाल, ¨हसालू, काफल, भीमल जैसी प्रजातियों के रोपण के निर्देश दिए। कहा कि इससे जहां स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ेगी, वहीं वन्यजीवों को भोजन मिलने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष थामने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर बताया गया कि कैंपा के मूल्यांकन व मॉनीट¨रग के लिए एमआईएस तैयार किया गया है। ई-ग्रीन वॉच द्वारा सेटेलाइट के माध्यम से भौतिक सत्यापन भी कराया जा रहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह, प्रमुख वन संरक्षक जय राज, सचिव नियोजन रंजीत सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती, सीईओ कैंपा समीर सिन्हा आदि मौजूद थे।

इस साल ये होंगे कार्य

-भ मि व जल संरक्षण को विभिन्न क्षमता के 950 जल निकायों का सृजन

-3761 चेकडैम व खाल-चाल और 339 जलस्रोतों का जीर्णोद्धार

-3848 हेक्टेयर क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच का निर्माण

-437 हेक्टेयर क्षेत्र में पथ पौधरोपण

-कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट की तमाम गतिविधियों का संचालन

-2147 किलोमीटर वन व अश्व मार्गाें का सुदृढीकरण

-वन्यजीव सुरक्षा, वन अनुसंधान व वन पंचायतों का सुदृढ़ीकरण

-फलदार प्रजातियों के रोपण को दी जाएगी प्राथमिकता

Posted By: Jagran