'सिटिंग-गेटिंग' फॉर्मूले से मौजूदा विधायकों को मिला मौका, उत्तराखंड में भाजपा समन्वय से साधेगी हैट्रिक के समीकरण
भाजपा उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव में हैट्रिक लगाने के लिए सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर जोर ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
भाजपा उत्तराखंड में हैट्रिक के लिए त्रिस्तरीय समन्वय पर जोर
'सिटिंग-गेटिंग' फॉर्मूले से मौजूदा विधायकों को मिला मौका
सभी आठ सांसदों को विधानसभा सीटें बढ़ाने का टास्क।
रविंद्र बड़थ्वाल, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में सरकार और संगठन के साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय के रथ पर सवार होकर भाजपा अगले विधानसभा चुनाव में दमदार तरीके से खम ठोकने जा रही है। तालमेल के साथ होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में लोकसभा के पांच और राज्यसभा के तीन सदस्यों यानी सभी आठ सांसदों की भूमिका योगक्षेम की रहने वाली है।
यानी, विधानसभा सीटों की मौजूदा संख्या को सुरक्षित रखने के साथ उसमें वृद्धि करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। वहीं, सिटिंग-गेटिंग के फार्मूले पर ही आगे बढ़ने के संकेत देकर पार्टी ने वर्तमान 47 विधायकों को राहत दे दी है। इससे उन विधायकों को भी संभलने का मौका मिला है, पार्टी के सर्वे में जिनकी स्थिति नाजुक आंकी गई है।
सिटिंग-गेटिंग फार्मूले से विधायकों के पास कमजोरी को ताकत में बदलने का मौका
उत्तराखंड में लगातार तीसरे विधानसभा चुनाव में हैटट्रिक के समीकरण साधने के लिए त्रिस्तरीय समन्वय भाजपा की रणनीति का खास हिस्सा बन गया है। इसे मजबूत किलेबंदी के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा प्रदेश कोर कमेटी की हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में मंथन के बाद निर्णय किया गया कि सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल व भरोसे को मजबूत करने के साथ विपक्ष के नैरेटिव को ध्वस्त किया जाएगा। ये निर्णय अब जमीन पर उतरने लगे हैं।
सीएम कर रहे हैं सांसद और विधायकों संग मीटिंग
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के इन दिनों भाजपा के भीतर गुटीय खींचतान को लेकर नैरेटिव बनाने के प्रयासों को देखते हुए सत्ताधारी दल सतर्क हुई है। अगले विधानसभा चुनाव के नेतृत्वकर्ता के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकसभा क्षेत्रवार सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों की लगातार बैठकें ले रहे हैं। मंडल स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन के ठीक बाद इन बैठकों का क्रम आरंभ हो चुका है, ताकि विधानसभा चुनाव में लगने जा रही भाजपा की ताकत में बिखराव न होने पाए।
अगले विधानसभा चुनाव में योगक्षेम की भूमिका में दिखेंगे पार्टी के सभी आठ सांसद
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल के सांसद अलग-थलग नहीं दिखेंगे। उनकी सक्रिय भूमिका का ताना-बाना बुना गया है। राज्य में सभी पांच संसदीय क्षेत्रों के अंतर्गत 14-14 विधानसभा सीट हैं। कोर कमेटी के निर्णय के अनुसार प्रत्येक सांसद को भाजपा की वर्तमान विधानसभा सीटों का आंकड़ा सुरक्षित रखना ही है, साथ में इसमें वृद्धि करने का टास्क भी दिया गया है।
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पार्टी की चिंता हारी हुईं 23 सीटों के साथ कुछ ऐसी सीट भी हैं, जिनकी रिपोर्ट पार्टी के आंतरिक सर्वे में अच्छी नहीं आंकी गई। इन सीटों पर वर्तमान विधायकों को जनता के बीच सक्रिय होने और प्रदर्शन सुधारने को कहा गया है।
