जागरण संवाददाता, देहरादून। चालक के लाइसेंस को आधार बना दुर्घटनाग्रस्त वाहन का क्लेम निरस्त करने वाली बीमा कंपनी को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने झटका दिया है। उसे क्लेम अदायगी के साथ ही क्षतिपूर्ति का भी आदेश दिया है। आयोग ने अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय की विधि व्यवस्था को भी आधार बनाया, जिसमें कहा गया है कि जो चालक हल्का मोटर वाहन चलाने के लिए अधिकृत है, वह ट्रांसपोर्ट व्हीकल भी चला सकता है।

टैगोर कालोनी निवासी अनमोल अग्रवाल ने ओरियंटल इंश्योरेंस के शाखा कार्यालय को पक्षकार बना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। वादी के अनुसार उनका वाहन उक्त कंपनी से 8 लाख 75 हजार रुपये के लिए बीमित था। यह वाहन सचिवालय में किराए पर लगाया गया था। मोहंड के पास एक ट्रैक्टर ट्राली से टकराकर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसकी उन्होंने थाना बिहारीगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसके साथ ही इस घटना की सूचना बीमा कंपनी को भी दी। वाहन की मरम्मत पर उनके एक लाख 65 हजार रुपये खर्च हुए। पर कंपनी ने यह कहकर क्लेम निरस्त कर दिया कि उन्होंने बीमा शर्तों का उल्लंघन किया है। बीमा कंपनी ने आयोग में कहा कि क्लेम इसलिए निरस्त किया गया क्योंकि चालक व्यावसायिक वाहन चलाने के लिए अधिकृत नहीं था। वहीं, प्रस्तुत साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि चालक के पास व्यावसायिक वाहन का लॄनग लाइसेंस था।

वहीं मोटर साइकिल व हल्के मोटर वाहन का उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार सह चालक सीट पर एक अन्य व्यक्ति बैठा था, जिसके पास व्यावसायिक वाहन का वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। वाहन पर 'एल' चिह्न लगा होने पर सर्वेयर कोई स्पष्ट रिपोर्ट नहीं दे पाया। जिस पर आयोग के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह दुग्ताल व सदस्य विमल प्रकाश नैथानी ने कंपनी को तीस दिन के भीतर क्लेम अदायगी का आदेश दिया है। बीमा कंपनी को 15 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देने होंगे।

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Edited By: Raksha Panthri