जागरण संवाददाता, ऋषिकेश : गंगा की रक्षा के लिए कठोर कानून बनाने की मांग को लेकर देह त्याग करने वाले स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के पार्थिव शरीर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद रविवार को अंतिम दर्शन नहीं हो पाए। एम्स प्रशासन को अभी यह आदेश नहीं मिले है। लिहाजा, आदेश मिलने के बाद यहां अंतिम दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया था कि एम्स प्रशासन प्रत्येक रविवार 50 लोगों को स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कराएगा। दस रविवार तक यह व्यवस्था रहेगी। स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के अनुयायियों को उनके अंतिम दर्शन कराने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अब तक एम्स प्रशासन को नहीं मिले हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश दिए थे कि एम्स प्रशासन स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को उनके अनुयायियों को दर्शन कराने की व्यवस्था करें। 10 रविवार तक प्रतिदिन 50 लोगों को दर्शन कराने के आदेश न्यायालय ने दिए थे। 50 में भी 10-10 करके दर्शन कराने की व्यवस्था करने को कहा गया था। आदेश जारी होने के बाद इस रविवार को स्वामी सानंद के दर्शन करने के लिए कोई भी अनुयाई वहां नहीं पहुंचा और न ही सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित आदेश एम्स प्रशासन को मिले हैं। एनाटॉमी के विभागाध्यक्ष डॉ विजेंद्र ¨सह ने कहा कि जब आदेश हमें मिल जाएंगे तो उसमें न्यायालय की गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। आदेश मिलने के बाद एनाटॉमी विभाग में ही स्वामी सानंद के अंतिम दर्शन की व्यवस्था एम्स प्रशासन करेगा। यहां यह भी देखा जाएगा कि स्वामी सानंद ने जिस उद्देश्य के लिए अपना शरीर एम्स को दान किया था वह उद्देश्य इस व्यवस्था से प्रभावित न हो। उल्लेखनीय है कि 113दिन से अनशनरत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने 11 अक्टूबर को एम्स ऋषिकेश में देह त्याग किया था। उन्होंने इससे पूर्व एम्स को अपनी देह दान का संकल्प पत्र भरकर दिया था।

Posted By: Jagran

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