देहरादून, जेएनएन। स्वास्थ्य विभाग के संविदा चिकित्सक ही अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना को पलीता लगा रहे हैं। ताजा मामले हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर से जुड़े हैं। जहां मरीज रेफर करने के नाम पर बड़ा खेल हुआ है।

जीवन ज्योति हॉस्पिटल टिक्कमपुर-सुल्तानपुर हरिद्वार व सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, काशीपुर के खिलाफ प्रथम दृष्टि में योजना के संचालन में अनियमितताएं, अनुबंध का उल्लंघन व धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। इसे देखते हुए योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर पंत ने इनकी सूचीबद्धता (इम्पैनलमेंट) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर इनके सभी भुगतान रोक दिए हैं। इनकी जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया गया है, जो 15 दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट देगी। 

एक ही डॉक्टर ने अलग-अलग अस्पताल से रेफर किए मरीज 

जीवन ज्योति हॉस्पिटल द्वारा इम्पैनलमेंट के लिए दिए गए आवेदन पत्र में चिकित्सालय में पंजीकृत डॉक्टरों की कुल संख्या चार बताई गई। जिसमें डॉ. जॉर्ज सैमुअल का नाम अंकित नहीं था। पर अस्पताल द्वारा प्रस्तुत कुछ क्लेम का परीक्षण करने पर पाया गया कि डिस्चार्ज समरी व क्लीनिकल नोट्स में उनके हस्ताक्षर हैं। 

डॉ. जॉर्ज मई 2015 से जनपद हरिद्वार की विभिन्न राजकीय इकाईयों में संविदा के आधार पर पूर्णकालिक एलोपैथिक चिकित्सक रहे हैं। वर्तमान में वे अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रायसी में तैनात हैं। वह प्रिया हॉस्पिटल हरिद्वार में भी एकल चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं, जिसकी सूचीबद्धता हाल में ही निलंबित की गई है। 

जीवन ज्योति अस्पताल ने 17 अप्रैल तक कुल 94 क्लेम प्रस्तुत किए हैं। जिसमें 93 नेत्र व्याधियों से जुड़े हैं। यह सभी केस सरकारी चिकित्सा इकाईयों से रेफर किए गए हैं। जिसमें 9 रेफरल पत्रों पर किसी भी चिकित्सक के हस्ताक्षर नहीं हैं। 56 रेफरल पत्रों पर डॉ. जॉर्ज सैमुअल के हस्ताक्षर हैं। 

जनवरी से फरवरी माह के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्सर से 33, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ढण्डेरा से मार्च से अप्रैल तक 24 व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 33 मामले रेफर हुए हैं। जहां-जहां डॉ. जॉर्ज की तैनाती थी, वहां से मरीज जीवन ज्योति हॉस्पिटल को रेफर किए गए हैं। 

पति के अस्पताल में मरीज रेफर 

सहोता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, काशीपुर द्वारा इम्पैनलमेंट के लिए दिए गए आवेदन पत्र में पंजीकृत चिकित्सकों की संख्या नौ बताई। जिनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ के तौर पर डॉ. नवप्रीत कौर का नाम अंकित है। वह एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय, काशीपुर में संविदा पर तैनात पूर्णकालिक चिकित्सक हैं। सहोता हॉस्पिटल ने आठ अप्रैल तक कुल 93 क्लेम प्रस्तुत किए। जिसमें 9 केस सिजेरियन, 21 केस नवजात से संबंधित, 35 केस डायलिसिस व सात मोतियाबिंद के हैं। 

सिजेरियन प्रसव के नौ केस का परीक्षण करने पर पाया गया कि तीन केस एलटी भट्ट राजकीय चिकित्सालय, काशीपुर से रेफर किए गए हैं। एक मरीज नसरीन को डॉ. नवप्रीत ने स्वयं रेफर किया है। रेफरल स्लिप पर निश्चेतक की उपलब्धता न होना दर्शाया गया है। दोपहर बाद उन्होंने ही सहोता हॉस्पिटल में महिला की सिजेरियन डिलिवरी की। 

एक अन्य केस में डॉ. नवप्रीत ने एक रोगी की दो प्रसव पूर्ण जांचें एलटी भट्ट चिकित्सालय में कराई, पर प्रसव सहोता हॉस्पिटल में कराया गया। यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह अस्पताल उनके पति डॉ. रवि सहोता का है। उक्त 9 सिजेरियन प्रसव में छह शिशुओं को नियोनेटल आइसीयू में भर्ती कर योजना के तहत उनके क्लेम प्राप्त किए गए। इसके अलावा मोतियाबिंद के छह केस में मेडिकल मैनेजमेंट का पैकेज लेकर प्रति मरीज 9 से दस हजार तक अतिरिक्त क्लेम प्राप्त किया गया। 

निजी अस्पताल पर 11.82 लाख जुर्माना

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की लाभार्थी को उपचार न देने पर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने श्री महंत इंदिरेश अस्पताल पर 11,82,500 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह अस्पताल द्वारा मरीज को अनाधिकृत रूप से दिए गए एस्टिमेट की पांच गुना रकम है। जिसे अस्पताल को एक सप्ताह के भीतर राज्य स्वास्थ्य अभिकरण में जमा करना होगा। 

बता दें, इस प्रकरण में मरीज की समय पर इलाज न मिलने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती गई और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। दरअसल, 18 जनवरी को कोटद्वार निवासी पिंकी प्रसाद को चंद्रमोहन सिंह नेगी राजकीय बेस चिकित्सालय, कोटद्वार में भर्ती कराया गया था। हृदय रोग के कारण उन्हें रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजनों ने 21 जनवरी को उन्हें श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती कराया। 

अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित ने मरीज के परीक्षण के बाद उपचार शुरू किया। उन्हें आइसीयू में रखा गया। साथ ही डॉक्टर ने सीटीवीएस (कार्डियो थोरेक्स एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग से ओपिनियन लेने की सलाह दी। सीटीवीएस विभाग ने कहा कि मरीज को ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता है। पर योजना के अनुरूप अनुमन्य चिकित्सा उपचार देने के बजाय 29 जनवरी को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। 

उस पर सर्जरी का 2,36,500 रुपये का एस्टिमेट उन्हें दिया गया, जबकि यह सर्जरी योजना में शामिल है। चिकित्सालय से डिस्चार्ज होने के बाद महिला के पति ने कोटद्वार तहसील पर धरना दिया व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इलाज के लिए अनुरोध किया। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना। 

अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते कहा कि मरीज की सर्जरी लायक अवस्था नहीं थी। स्टेबल होने पर ही उन्हें डिस्चार्ज किया गया। इसके बाद वह वापस अस्पताल नहीं आईं। खर्च का ब्योरा दिए जाने का कोई उल्लेख अस्पताल ने नहीं किया। अस्पताल का उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण की कार्यकारिणी समिति की बैठक में अस्पताल पर अर्थदंड लगाने का निर्णय लिया गया। 

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष युगल किशोर पंत ने मंगलवार को इसके आदेश कर दिए हैं। बताया गया कि दो अन्य मरीज शोएब व अमृता देवी के साथ भी अस्पताल में इसी तरह का व्यवहार किया गया। अमृता को 3,95,800 रुपये का एस्टिमेट दिया गया। जबकि शोएब से तीन लाख रुपये लिए गए। 

राज्य स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा जवाब तलब करने पर अस्पताल ने गलती स्वीकार की। मरीज से ली गई रकम अस्पताल ने वापस कर दी और अटल आयुष्मान योजना के तहत क्लेम प्रस्तुत किया। दूसरे प्रकरण में भी मरीज से वापस संपर्क कर इलाज योजना के तहत किया गया।

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Posted By: Bhanu

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