राज्य ब्यूरो, गैरसैंण। उत्तराखंड में कोरोनाकाल में मार्च 2020 से 15 फरवरी 2021 तक शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों, कोविड केयर सेंटरों के साथ ही अन्य स्थानों से फेस मास्क, ग्लब्स, हैंड सैनिटाइजर की बोतलें व पॉलीथिन की थैलियों के रूप में 811 मीट्रिक टन बायोमेडिकल वेस्ट निकला। इसमें से 657 मीट्रिक टन को उपचारित किया गया। बजट सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने विधायक प्रीतम सिंह पंवार के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्वारंटाइन सेंटरों, कोविड केयर सेंटरों से निकलने वाले कचरे के साथ ही कोविड से बचाव के लिए एक बार इस्तेमाल होने वाली सामग्री का निस्तारण बायोमेडिकल वेस्ट के तौर पर किया गया जा रहा है। इस बारे में केंद्र की गाइडलाइन सभी नगर निकायों को पहले ही उपलब्ध करा दी गई थी। विधायक मुन्ना सिंह चौहान, प्रदीप बत्रा के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में डा. रावत ने बताया कि प्रदेश की जनता कोविड से बचाव के मद्देनजर मानकों का पूरी तरह से अनुपालन कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन नगर निकायों में कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि नहीं है, वहां वन भूमि की उपलब्धता के प्रयास किए जा रहे हैं।

जहां भूमि, भवन व छात्रों की उपलब्धता है, वहां बंद नहीं होंगे आइटीआइ

कौशल विकास मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने सदन को आश्वस्त किया कि जहां भूमि, भवन और छात्रों की उपलब्धता है, वहां राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) बंद नहीं किए जाएंगे। डा. रावत ने विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी के मूल प्रश्न पर विधायकों द्वारा किए गए अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में यह बात कही। विधायक नेगी अस्वस्थता के कारण सदन में उपस्थित नहीं थे। पीठ ने व्यवस्था दी कि उनके प्रश्न पर अनुपूरक किए जा सकते हैं। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने कहा पूर्व में सदन में आश्वासन दिया गया था कोई आइटीआइ बंद नहीं होगा। बावजूद इसके उनके विधानसभा क्षेत्र के तीनों आइटीआइ बंद कर दिए गए। ऐसी ही शिकायत विधायक बिशन सिंह चुफाल व गोविंद सिंह कुंजवाल की भी थी। अनुपूरक प्रश्नों के जवाब में मंत्री डा. रावत ने प्रदेश में वर्तमान में 152 आइटीआइ स्वीकृ़त हैं। इनमें से 86 को नेशनल काउंसिल फार वोकेश्नल ट्रेनिंग यानी एनसीवीटी के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं। 34 संस्थानों को बीते दो वर्षों में एनसीवीटी की मान्यता दिलाई गई है। उन्होंने कहा कि भूमि, भवन व छात्रों के उपलब्ध होने पर एससीवीटी के आइटीआइ भी संचालित किए जाएंगे।

गुलिया, छिल्का की रायल्टी दरों का नए सिरे से होगा वाजिब निर्धारण

जंगलों में गुलिया (कटे, गिरे व सूखे पेड़ों की जड़े) व छिल्का (पेड़ों के बक्कल) निकालने के लिए रायल्टी की दरों का परीक्षण कराकर इन्हें वाजिब किया जाएगा। पूर्व में विभाग ने रायल्टी की दर एक हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दी थी। वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने विधायक देशराज कर्णवाल के मूल प्रश्न के साथ ही विधायक चंदन रामदास, उमेश शर्मा काऊ व महेंद्र भट्ट के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में यह बात कही। उन्होंने कहा कि नदियों में उपखनिज की उपलब्धता, केंद्र से स्वीकृति में देरी जैसे कारणों से उपखनिज चुगान की उपलब्धता व बिक्री में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सभी जगह वन विकास निगम द्वारा की जाने वाली उपखनिज की बिक्री की दरें लगभग समान हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों से कीड़ा जड़ी विदोहन की नीति पिछले वर्ष तैयार की गई थी, मगर तब कोरोनाकाल के कारण यह कार्यरूप में परिणत नहीं हो पाई। इस साल से इसी नीति के आधार पर कीड़ा जड़ी का विदोहन होगा।

तीन वर्षों में वन पंचायतों को दिए 226 करोड़

वन मंत्री ने विधायक देशराज कर्णवाल के प्रश्न के उत्तर में बताया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य की वन पंचायतों को 226.23 करोड़ की धनराशि विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों के साथ ही विभागीय प्रयासों का नतीजा रहा कि प्रदेश में आठ वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है।

चरेख डांडा में अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान को 10 करोड़ का प्रविधान

आयुष मंत्री डा.हरक सिंह रावत ने कहा कि दुगड्डा विकासखंड के अंतर्गत चरेख डांडा में अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान की स्थापना के लिए 10 करोड़ का प्रविधान किया गया है। इसकी स्थापना जल्द होगी। डा.रावत ने विधायक ऋतु खंडूड़ी के अनुपूरक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। इससे पहले विधायक देशराज कर्णवाल के मूल प्रश्न के जवाब में डा.रावत ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों के 250 पदों को भरने के लिए अधियाचन भेजा गया है। उन्होंने झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र में आयुर्वेदिक चिकित्सालय खोला जाएगा।

राज्य में बनेंगे पांच बंदरबाड़े

वन मंत्री ने विधायक चंदन रामदास के मूल प्रश्न और विधायक बिशन सिंह चुफाल व राम सिंह कैड़ा के अनुपूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि प्रत्येक जिले में बंदरबाड़े बनाने की मुख्यमंत्री की घोषणा अभिलेखों में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बंदरों की समस्या को देखते हुए राज्य में पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चिडि़यापुर, केदारनाथ वन प्रभाग और दानीबांगर में बंदरबाड़े स्थापित किए जाएंगे। इनके लिए केंद्र से धनराशि भी मंजूर हो गई है। इन बाड़ों में करीब 40 हजार बंदरों को पकड़कर रखा जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि चिड़ियापुर और रानीबाग के रेसक्यू सेंटरों में अभी तक 38115 बंदरों को पकड़कर लाया गया और फिर इनका बंध्याकरण किया गया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से पकड़कर बंदरों को यहां न छोड़ा जाए, इसके लिए वन समेत सभी विभागों को सीमा पर चैकिंग सशक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

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