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उत्तराखंंड के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट: छह साल में 71 हजार ने छोड़ा विद्यालय, विभाग परेशान

Published: Mon, 21 Sep 2026 07:53 AM (IST)

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पिछले छह वर्षों में 71,671 छात्रों की कमी आई है, जिससे कुल छात्र संख्या 5,05,853 ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. छह वर्षों में 71,671 छात्रों ने उत्तराखंड के सरकारी स्कूल छोड़े।

  2. वर्तमान में 5,834 सरकारी स्कूलों में 20 से भी कम छात्र।

  3. घटती छात्र संख्या पर बनी रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं।

अशोक केडियाल, देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। पिछले छह वर्षों में करीब 71,671 छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए हैं। वर्ष 2019-20 में पहली से 12वीं तक के सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या 5,77,534 थी, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 5,05,853 रह गई।
वर्तमान में प्रदेश के 16 हजार से अधिक सरकारी विद्यालयों में 5,834 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 20 से भी कम रह गई है। वहीं, पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में केवल नौ नए सरकारी स्कूल खोले गए हैं। घटती छात्र संख्या के कारण आने वाले समय में शिक्षा विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और भवन उपलब्ध होने के बावजूद पढ़ने वाले छात्रों की संख्या सीमित रह सकती है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं को निजी विद्यालयों के समकक्ष बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

दो साल पहले रिपोर्ट बनाई और विभाग सो गया

वर्ष 2024-25 में शिक्षा विभाग ने तत्कालीन अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा कुलदीप गैरोला की अगुवाई में सात विशेषज्ञ शिक्षकों की समिति गठित की थी। समिति को राजकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में घटती छात्र संख्या के कारणों का अध्ययन कर सुधार के सुझाव देने थे। समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंपी। रिपोर्ट के सुझावों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

109 माध्यमिक व 3799 स्कूलों में छात्र संख्या 20 से कम

सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या में गिरावट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 109 माध्यमिक और 3,799 प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 11 से 20 के बीच रह गई है।

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हर साल प्रवेशोत्सव आयोजन की रस्म

सरकारी स्कूलों में छात्र नामांकन बढ़ाने के लिए हर वर्ष अप्रैल में प्रवेशोत्सव आयोजित किया जाता है। इसके माध्यम से नए छात्रों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। लेकिन कोई लाभ नहीं दिखता।

‘छात्र संख्या बढ़ाने के लिए हर वर्ष स्कूलों में प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाता है। सरकारी विद्यालयों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। अभिभावकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के प्रति जागरूक किया जाएगा।’

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डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री