उत्तराखंड के बागेश्वर में भूस्खलन से बना 40 मीटर ऊंचा बांध, 37 लाख घन मीटर पानी जमा... बाढ़ का खतरा
उत्तराखंड के बागेश्वर में शंभू नदी पर लगातार भूस्खलन से 40 मीटर ऊंचा बांध बन गया है, जिससे 37 लाख घन मीटर पानी की विशाल झील बन गई है।

शंभू नदी पर भूस्खलन के मलबे से बनी झील।

समय कम है?
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सुमन सेमवाल, देहरादून। बागेश्वर स्थित कपकोट तहसील के कुवारी में लगातार सक्रिय भूस्खलन ने शंभू नदी को बार-बार रोककर विशाल झील बना दी है। जिसकी बांधनुमा ऊंचाई करीब 40 मीटर है, जबकि लंबाई में इसका आकार 1.13 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है।
झील की स्थिति नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के सेटेलाइट अध्ययन में सामने आई। जिसे 05 सितंबर 2026 को डिस्कवर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। यह अध्ययन एनआरएससी के विज्ञानी अंकिता घोके, अंकिता गौर, प्रियम राय, पुनीत जालान, तपस रंजन मार्था और ईश्वर चंद्र दास ने किया।
2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान हुआ था पहला बड़ा भूस्खलन
अध्ययन में वर्ष 2013-25 के उपग्रह चित्र, सेंटिनल-1 रडार और मैदानी भूवैज्ञानिक सर्वे को आधार बनाया गया। बताया गया है कि कुवारी गांव करीब 2350 मीटर की ऊंचाई पर शंभू नदी के दाहिने किनारे स्थित है। यहां पहला बड़ा भूस्खलन जून 2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान हुआ।
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जून 2014, नवंबर 2016, अप्रैल 2017 तथा अप्रैल-जून 2022 में फिर भूस्खलन की सक्रियता हुई। मार्च 2013 में भूस्खलन 500-600 मीटर लंबा था और जून 2013 के बाद 965 मीटर हो गया। वर्ष 2018 में फिर भूस्खलन शुरू हुआ, जो बाद में मुख्य हिस्से से मिला।
वर्ष 2023 और 2024 में भी अचानक भूस्खलन हुआ और अक्टूबर 2024 तक चार सक्रिय भूस्खलन अस्तित्व में आ गए। वर्तमान भूस्खलन क्षेत्र करीब 0.95 वर्ग किमी है।
भूस्खलन के साथ बढ़ता गया झील का आकार
झील वर्ष 2017 में 500 मीटर, 2022 में 885 मीटर और 2024 की घटना के बाद 1130 मीटर हुई। नदी रोकने वाला मलबा का अवरोध करीब 60 मीटर चौड़ा, 58 मीटर लंबा और 40 मीटर ऊंचा है। इसका क्षेत्र करीब 10,000 वर्ग मीटर है और पानी के बहाव से यह आंशिक रूप से कट चुका है। अध्ययन में इस अवरोध को अस्थिर भी बताया गया है।
37 लाख घन मीटर पानी बना खतरा
विज्ञानियों के अनुसार झील में करीब 37 लाख घन मीटर पानी जमा है। यदि झील टूटती है तो इससे निकलने वाली बाढ़ की रफ्तार 15 मीटर प्रति सेकेंड होगी। ऐसी दशा में इसका मुख्य प्रभाव क्षेत्र 06 किमी तक आंका गया है।
कुछ जगह जलस्तर 10 मीटर तक बढ़ सकता है, जो निचले क्षेत्र में मेलखेत, देओसारी व देवाल तक को प्रभावित कर सकता है। विज्ञानियों ने झील की निरंतर निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और ढलान स्थिरीकरण की जरूरत बताई है।
