दून के श्रीदेव सुमन विवि की परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा: कॉपी जांचे बिना दे दिए 27 नंबर, अंग्रेजी में 56 से घटाकर 30 किए
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां एक छात्र को बिना कॉपी जांचे ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
बिना कॉपी जांचे छात्र को दिए गए 27 अंक
अंग्रेजी में 56 के बजाय 30 अंक देकर फेल किया
आरटीआई और शिकायत के बाद भी नहीं सुधरे अंक
जागरण संवाददाता, देहरादून। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीए पांचवें सेमेस्टर के एक छात्र की साइकोलाजी की कापी में एक भी प्रश्न के आगे अंक नहीं लिखे थे। बिना कापी जांचे उसे 75 में से 27 नंबर दे दिए गए।
अंग्रेजी के पेपर में तो छात्र के 56 अंक होने के बावजूद रिजल्ट में 30 अंक चढ़ाकर उसे फेल कर दिया गया। छात्र ने सूचना के अधिकार में जवाब मांगा तो गड़बड़ी सामने आई। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी सुधार के बजाय 30 अंक बढ़ाकर 36 कर दिए गए।
आरटीआई में खुली विवि की परीक्षा व्यवस्था की पोल
मामला राजकीय महाविद्यालय देहरादून, सुद्धोवाला का है। छात्र ने दिसंबर में बीए पांचवें सेमेस्टर की साइकोलॉजी असेसमेंट परीक्षा दी थी। आरटीआई से मिली जानकारी में सामने आया कि उसकी उत्तर पुस्तिका में किसी प्रश्न के सामने अंक दर्ज नहीं थे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने 27 अंक दर्ज कर दिए। छात्र ने जब मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की तो उम्मीद थी कि विश्वविद्यालय रिकॉर्ड की जांच कर गलती सुधारेगा।
लेकिन शिकायत के बाद भी अंकों को लेकर स्थिति और उलझ गई। छात्र के अनुसार अंग्रेजी में उसे 56 अंक मिले थे, जबकि रिजल्ट में 30 अंक दर्ज कर फेल कर दिया गया। शिकायत के बाद 30 को 36 कर दिया गया, लेकिन वास्तविक 56 अंक दर्ज नहीं किए गए।
कॉलेज की जांच में 50 अंक निकले
मामला सामने आने के बाद महाविद्यालय ने विषय विशेषज्ञ से साइकोलॉजी की कॉपी का दोबारा मूल्यांकन कराया। प्राचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, मूल्यांकन में छात्र को 75 में से 50 अंक मिले हैं। यानी विश्वविद्यालय की ओर से दर्ज 27 अंकों से 23 अंक अधिक।
सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी अंकों का खेल नहीं रुका
प्राचार्य ने कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजी जाएगी। रिजल्ट में संशोधन का निर्णय विश्वविद्यालय स्तर पर लिया जाएगा। अब सवाल यह है कि जब कालेज के दोबारा मूल्यांकन में छात्र के 50 अंक आए हैं तो विश्वविद्यालय की ओर से 27 अंक कैसे दर्ज किए गए और शिकायत के बाद भी रिजल्ट में सही अंक क्यों नहीं जोड़े गए।
