राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में आपदा से करीब 250 करोड़ रुपये की क्षति होने का अनुमान है। हालांकि, अभी आपदा राहत टीमें क्षेत्र के गांवों में राहत पहुंचाने के कायों में जुटी हुई हैं। राहत कार्य पूरा होने के बाद ही आपदा में हुई क्षति की सही तस्वीर सामने आ पाएगी। वहीं, शासन का दावा है कि तीन-चार दिन के भीतर आराकोट क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले सभी रास्तों को खोल दिया जाएगा। इसके लिए प्रयास चल रहे हैं।

आराकोट क्षेत्र में बीती 18 अगस्त को बादल फटने के साथ ही कुदरत का कहर बरपा। इसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होने के साथ ही जिंदगी भी पटरी से उतरी हुई है। यही नहीं, आपदा ने राज्य के इस बड़े सेब उत्पादक क्षेत्र में किसानों की आर्थिकी पर बड़ी चोट की है। हालांकि, आपदा राहत टीमें राहत कार्याें में जुटी हुई हैं, लेकिन जिस हिसाब से वहां नुकसान हुआ है उसने हर किसी को सोचने पर विवश कर दिया है।

सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी के मुताबिक आराकोट क्षेत्र में करीब 250 करोड़ रुपये की क्षति होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि आपदा राहत टीमें क्षेत्र में जुटी हुई हैं। राहत कार्य पूरा होने के बाद ही क्षति की सही तस्वीर सामने आ पाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि क्षेत्र में रोड नेटवर्क को काफी हद तक खोल दिया गया है। तीन-चार दिन के भीतर लगभग सभी संपर्क मार्गाें को खुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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मजदूरों के जरिये भेज रहे राशन

आराकोट के आपदा प्रभावित 50 से ज्यादा गांवों में खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित करने को गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। सचिव खाद्य सुशील कुमार ने बताया कि आराकोट स्थित खाद्य गोदाम में अक्टूबर तक का खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा चुका है। जिन गांवों के लिए रास्ते बंद हैं, वहां मजदूरों के जरिये राशन भेजना शुरू कर दिया गया है। इसके लिए राशन के छोटे-छोटे पैकेट बनाए गए हैं, ताकि इन्हें ले जाने में दिक्कत न हो।

Posted By: Jagran

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