जागरण संवाददाता, देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार बनने के बाद से ही उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है। सचिवालय व मुख्यमंत्री कार्यालय को भ्रष्ट व माफिया तत्वों से मुक्त किया है। कार्यो की पारदर्शिता के लिए ऑडिट होना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर थर्ड पार्टी ऑडिट भी होना चाहिए। यह बात उन्होंने शुक्रवार को थानो रोड स्थित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चावल घोटाले का जो मसला है, वह वर्ष 2016-17 की तत्कालीन सरकार के समय का है। भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने इस मामले की जाच करवाई, जिसमें पता चला कि केवल कागजों में ही राशन दिखाई देता था। जरूरतमंदों तक राशन पहुंचता ही नहीं था। आज गरीबों को जो राशन मिल रहा है, वह उच्च गुणवत्ता युक्त है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग में पीएस (निजी सचिव) की भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है। लोक सेवा आयोग में अधिक वर्कलोड होने के कारण भर्ती प्रक्रिया में समय अधिक लगता है। वहीं कोरोना महामारी के कारण भी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई है। लोक सेवा आयोग को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय में एक प्रकोष्ठ गठित किया गया है। जिसका काम स्वरोजगार के लिए पंजीकरण करने वालों की समस्याओं का निस्तारण करना है। इस प्रकोष्ठ में अध्यक्ष के रूप में पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी, सदस्य के रूप हार्क संस्था के संस्थापक महेंद्र सिंह कुंवर व मुख्यमंत्री के आíथक सलाहकार आलोक भट्ट शामिल हैं।

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