जागरण संवाददाता, देहरादून : अस्पताल में भर्ती मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता से अब कोई समझौता नहीं होगा। मरीजों को जाच के बाद ही भोजन परोसा जाएगा। फिलहाल इस तरह की व्यवस्था कोरोनेशन अस्पताल में अमल में लाई जा रही है। इस बाबत अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीसी रमोला ने संबंधित चिकित्सकों, अधिकारियों व अन्य कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं। साफ तौर पर कहा गया है कि मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जाच सुनिश्चित की जाए। भोजन की गुणवत्ता की जाच के बाद ही उसको मरीजों को दिया जाए।

दरअसल, सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर आए दिन सवाल उठते रहते हैं। मरीज कभी उनको परोसे जाने वाले भोजन में कीड़ा मिलने या फिर गुणवत्ता खराब होने की शिकायत करते रहते हैं। इस बात को लेकर कई मर्तबा मरीजों के तीमारदार अस्पतालों में हंगामा भी कर चुके हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों को तीन समय का भोजन उपलब्ध कराने के लिए सभी जगह कैंटीन हैं। इन कैंटीनों का संचालन निविदा प्रक्रिया के बाद ठेकेदारी प्रथा पर किया जाता है। कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए दूसरी कैंटीन से कट्टों में रोटिया पैक करा कर ले जाने का मामला पूर्व में प्रकाश में आया था। लिहाजा पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने इस दिशा में कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के लिए जो भी भोजन दिया जाता है उसकी गुणवत्ता की पहले जाच कर ली जाए। भोजन की गुणवत्ता की जाच करने की जिम्मेदारी संबंधित वार्ड में तैनात अधिकारी/ कर्मचारी की होगी। यदि भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की मिलावट/ विसंगति पाई जाती है तो इसकी सूचना तत्काल चिकित्सा अधीक्षक को दी जाए। निर्देश का सख्ती से पालन नहीं करने वालों पर प्रशासनिक कार्रवाई करने की बात भी उन्होंने कही है।

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Posted By: Jagran