रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून

लोकसभा चुनाव का मौका और पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक के बाद बने माहौल के बाद भाजपा की ताबड़तोड़ जनसभाओं पर विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस भले ही आक्रामक हो, लेकिन जन भावनाओं के इस उभार को सैनिक बहुल उत्तराखंड में अपनी ओर मोड़ने में कांग्रेस भी कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। देहरादून में 16 मार्च को जनसभा संबोधित करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कश्मीर में शहीद हुए जांबाजों मेजर चित्रेश बिष्ट, सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर मोहनलाल रतूड़ी और मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के घर जाकर परिजनों से मुलाकात करेंगे और उन्हें सांत्वना देंगे। राहुल के इस कार्यक्रम से सूबे की सियासत गर्मा गई है।

वीर भूमि उत्तराखंड के जांबाजों का देश की सुरक्षा में बड़ा योगदान है। इस वजह से सैनिक बहुल राज्य में सैन्य परिवारों को लुभाने के लिए हर दल शिद्दत से कोशिश कर रहा है। राज्य की सभी पांचों सीटों पर सैन्य परिवारों की अच्छी-खासी संख्या है। एयर स्ट्राइक के बाद देशभर में बदले माहौल के असर से उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। इसे भांपकर ही कांग्रेस राज्य में अपनी चुनावी रणनीति को सतर्क होकर अंजाम देने में जुटी है। उत्तराखंड में पार्टी की इस रणनीति को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नई धार देंगे।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तराखंड शामिल है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राहुल गांधी के रूप में किसी राष्ट्रीय दल की पहली चुनावी सभा 16 मार्च को हो रही है। कांग्रेस राहुल की सभा के रूप में कई तरह से लीड लेने की कोशिश में जुटी है। पुलवामा आतंकी हमले में भी उत्तराखंड के दो जाबांज शहीद हुए, जबकि कश्मीर में पाकिस्तान और आतंकियों से लोहा लेते हुए दो नौजवान मेजर ने शहादत दी है। पार्टी ने मौजूदा माहौल को देखते हुए शहीद परिवारों से राहुल गांधी की मुलाकात का कार्यक्रम तय किया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने बताया कि जनसभा समाप्त होने के तुरंत बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे राहुल गांधी शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट के नेहरू कालोनी स्थित आवास जाएंगे। वहां से वह कांवली रोड स्थित सीआरपीएफ के शहीद सब इंस्पेक्टर मोहनलाल रतूड़ी के परिजनों से मुलाकात के बाद नेशविला रोड में शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के परिजनों से भेंट करेंगे। राहुल गांधी देश पर जान न्योछावर करने वाले जांबाज सैनिकों को शहीदों का दर्जा देने का वायदा अपनी सभाओं में करते रहे हैं। राहुल की शहीदों के परिजनों से इस मुलाकात के सियासी निहितार्थ भी तलाश किए जा रहे हैं।

Posted By: Jagran