देहरादून, [जेएनएन]: वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण 13 जुलाई को पड़ रहा है। यह ग्रहण पुनर्वसु नक्षत्र और हर्षण योग में होगा। हालांकि, भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इससे इसका आंशिक प्रभाव रहेगा। इसी दिन आषाढ़ माह की अमावस्या भी पड़ रही है। जिसमें पितृों की आत्मा की शांति के लिए दान और गंगा स्नान का विशेष महत्व है। 

ज्योतिषाचार्य पीपीएस राणा ने बताया कि भारत में ग्रहण का आंशिक प्रभाव सुबह 7:19 बजे से 9:44 बजे तक रहेगा। ग्रहण का मध्य काल 8 बजकर 13 मिनट 05 सेकेंड और मोक्ष काल 9 बजकर 43 मिनट 44 सेकेंड पर होगा। 

उन्होंने बताया कि इसका प्रभाव कर्क लग्न और मिथुन राशि में पड़ेगा। ग्रहण के दौरान मिथुन राशि में सूर्य और चंद्रमा दोनों रहेंगे। वहीं कर्क राशि के जातकों पर सूर्य और राहु की स्थिति के अनुसार अच्छा और बुरा प्रभाव पड़ सकता है। 

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए ओम सूर्याय नम: का जाप कर सूर्य को जल में लाल चंदन, रोली, लाल फूल से अ‌र्घ्य दें। साधनाकाल में आदित्य हृदयी स्रोत और गीता के 18वें अध्याय का पाठ भी शुभ रहेगा। 

उन्होंने बताया कि इस दिन पड़ने वाली अमावस्या का विशेष महत्व है। जिसमें पितृों की आत्मा की शांति के लिए दान आदि करना शुभ माना जाता है। लाल वस्तुओं का करें दान ग्रहण के बाद गुड़, लाल मसूर की दाल, गेहूं, लाल वस्त्र और दक्षिणा का दान करें। वहीं अमावस्या के दिन पितृों के नाम से आटा, चावल, उड़द की दाल आदि का दान ब्राह्मण और मंदिर में दें सकते हैं। 

गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ध्यान 

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं विशेष ख्याल रखें। ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए पाठ करें। साथ ही किसी भी नुकीली वस्तु और धातु का प्रयोग न करें।

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By Bhanu