संवाद सहयोगी, विकासनगर: योग गुरु बाबा रामदेव ने मंगलवार को पछवादून के डुमेट स्थित साधना केंद्र आश्रम में विदेशी साधकों को 'ॐ' तत्व के महत्व से परिचित कराया। कहा कि ॐ एक ब्रह्मांडीय ध्वनि है, जिससे मानव शरीर में ऊर्जा का संचार होने के साथ ही मन एवं मस्तिष्क भी एकाग्र होता है।

योग का महत्व समझाते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि योग महज व्यायाम नहीं है, वह तो खुद से जुड़ने का सबसे अच्छा साधन है। योगासनों का नियमित अभ्यास करने से शरीर संतुलित और बुद्धि का विकास होता है। मानव शक्ति को समृद्धशाली बनाने के लिए उसे योग से जोड़ना जरूरी है। कहा कि योग भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम विरासत है। योग के माध्यम से व्यक्ति को आसानी से निरोगी बनाया जा सकता है और जीवन का वास्तविक आनंद निरोगी शरीर में ही है।

बाबा ने कहा कि योग की शुरुआत ॐ ध्वनि से होती है। योग खुद से जुड़ने का एक सबसे अच्छा साधन है। उन्होंने साधकों को प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, कपालभाति आदि यौगिक क्रियाओं का भी अभ्यास कराया। सूर्य नमस्कार को संपूर्ण आसन बताते हुए योग गुरु ने कहा कि इसमें समय कम लगने के बावजूद शरीर के सभी अंगों से जुड़े आसन संपन्न होते हैं। लिहाजा, साधक को नित्य सूर्य नमस्कार करना चाहिए। इस मौके पर आश्रम के अधिष्ठाता चंद्र स्वामी उदासीन महाराज, स्वामी प्रेम विवेकानंद, स्वामी पुरुषार्थी, नवीन ठाकुर समेत कई साधक मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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