जागरण संवाददाता, देहरादून: ये इंतहा नहीं तो क्या है। दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल का बच्चा वार्ड निर्माण कार्यो के चलते करीब छह माह से बंद है। जिस कारण बच्चे यहा-वहा, अन्य वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। इससे व्यवस्था बनाने में भी दिक्कत आ रही है। हद ये कि जिम्मेदार इस समस्या से मुंह मोड़े बैठे हैं।

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में न सिर्फ दून बल्कि पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों से भी मरीज आते हैं। जिन्हें इन दिनों कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज बनने के बाद बच्चा वार्ड महिला अस्पताल परिसर में पीएनसी वार्ड के ऊपर द्वितीय तल पर शिफ्ट कर दिया गया है। जिसमें 25 बेड हैं। लेकिन वार्ड की व्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल प्रशासन जब तब घिरता रहा है। कभी बच्चों को टिन शेड की गर्मी में तपना पड़ा और कभी तूफान में छत उखड़ जाने के कारण मुसीबत झेली। इसके बाद टॉयलेट की दीवारों पर दरारें आ गई। जिस कारण वार्ड को मरम्मत कार्यो के लिए बंद करना पड़ा। हद ये कि छह माह बीतने के बाद भी वार्ड तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में बच्चों को चर्म रोग व सर्जिकल वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। इससे इन वार्ड की भी व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई हैं। इसके अलावा हाल में एमसीआइ के निरीक्षण के वक्त भी अस्पताल को इसके साइड इफेक्ट दिखाई दिए। स्किन वार्ड में बच्चे एडमिट होने पर एमसीआइ टीम ने इसे खामियों में गिनाया।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि वार्ड में कुछ काम बाकी है। जिसका प्रस्ताव प्राचार्य को भेजा जा चुका है। इसे स्वीकृति मिलने का इंतजार है। बजट मिलते ही कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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