उत्तराखंड का चंपावत जिला बना नया 'जमताड़ा', मिले 148 म्यूल खाते... सब पर दर्ज होगा केस
चंपावत में साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 148 म्यूल खाते सामने आए हैं।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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जागरण संवाददाता, चंपावत। जिले में साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 148 म्यूल खाते सामने आए हैं। जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में ऐसे खाते चिह्नित किए गए हैं।
खास बात यह है कि सभी 148 खातों में रकम मिलने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई के बाद खाताधारकों का सत्यापन शुरू कर दिया है। जांच पूरी होने के बाद सभी खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी पंजीकृत की जाएगी।
इन खातों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ), एक्सिस बैंक, आइडीएफसी समेत अन्य बैंकों के खाते शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्राड से हासिल रकम को इधर-उधर स्थानांतरित कर ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
क्षेत्राधिकारी देवेंद्र सिंह कप्रवान ने बताया कि 148 खातों की जांच पूरी हो चुकी है। सभी खातों में रकम मिली है। खातों को फ्रीज कराने के बाद संबंधित बैंकों से संपर्क कर खाताधारकों का विवरण जुटाया जा रहा है। खाताधारकों का सत्यापन पूरा होते ही सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
क्या होते हैं म्यूल खाते?
म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता है। साइबर ठग अक्सर कमीशन या पैसों का लालच देकर दूसरे लोगों के बैंक खाते इस्तेमाल करते हैं।
कई बार नौकरी या ऑनलाइन कमाई का झांसा देकर खाते खुलवाए जाते हैं अथवा पहले से संचालित खातों का उपयोग किया जाता है। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद कई अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी जाती है, जिससे मुख्य आरोपितों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जाती है।
टनकपुर में दो खातों से हुआ था साढ़े तीन लाख का लेनदेन
इससे पहले टनकपुर में दो बैंक खाते साइबर फ्राड में इस्तेमाल होते पाए गए थे। इन खातों के माध्यम से करीब साढ़े तीन लाख रुपये का लेनदेन हुआ था। मामले में खाताधारकों के खिलाफ प्राथमिकी भी पंजीकृत की गई थी। अब 148 खातों का मामला सामने आने के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र इसकी गहन पड़ताल में जुटा है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि खातों में पहुंची रकम कहां से आई और किन लोगों तक स्थानांतरित की गई।
धन निकासी पर भी नजर
साइबर अपराध के बाद ठग रुपये दूसरे खाते में भेजने के बाद उसे निकालने के लिए भी कई प्रयास करेंगे। जिसे देखते हुए पुलिस इन बिंदुओं पर भी नजर बनाए हैँ। इसमें एटीएम, चेक, पीओएस आदि माध्यमों से म्यूल खातों से रुपये निकाले पर लोकेशन ट्रैस कर रही है। ऐसे में सिर्फ खाताधारक ही नहीं बल्कि साइबर अपराधियों का तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
जिले में 148 म्यूल खाते संचालित होने की जानकारी प्राप्त हुई थी। जिसपर टीम गठित कर जांच पूरी कर ली गई है। अब तक तीन मामले भी पंजीकृत हो चुके हैं। शेष पर भी प्राथ्ज्ञमिकी पंजीकृत होगी। साथ ही पुलिस अन्य आरोपितों तक पहुंचने के लिए जुटी है। - देवेंद्र सिंह कप्रवान, सीओ चंपावत
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