संवाद सहयोगी, लोहाघाट : रक्षाबंधन के अवसर पर देवीधुरा में आज होने वाले बग्वाल युद्ध की सभी तैयारिया पूरी कर ली गई हैं। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी फलों से बग्वाल खेली जाएगी। मेला कमेटी के अनुसार बग्वाल दोपहर एक से तीन बजे के बीच होगी। इस समय चारों खाम के रणबांकुरे मैदान में पहुंचते ही शुरू हो जाएगी बग्वाल। बग्वाल युद्ध का नजारा देखने के लिए देश विदेश से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। इस कौतूहल को देखने के लिए लगभग दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी संख्या में पुलिस व पीएसी के जवानों की तैनाती कर दी गई है। दर्शक दीर्घा में कई मंत्रियों के पहुंचने की संभावना है।

मेला मजिस्ट्रेट शिप्रा जोशी समेत मेले के संचालन का जिम्मा संभाल रहे विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने देवीधुरा पहुंचकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। मेला मजिस्ट्रेट ने बताया कि मेला क्षेत्र में शांति व सुरक्षा के लिए चप्पे चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है। एलआइयू सहित पुलिस की टीमें पूरी तरह सक्रिय रहेगी। मेला क्षेत्र के आस पास वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित किया गया है। प्रशासन ने आस पास के लोगों को अपने छतों में भीड़ जमा न होने देने की अपील की है ताकि संभावित दुर्घटना से बचा जा सके। राजस्व विभाग व पुलिस ने शनिवार को क्षेत्र की दुकानों में छापामारी कर अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाया। एसपी डीएस गुंज्याल ने शराब पीकर उत्पात मचाने तथा माहौल खराब करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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मां बाराही के दरबार में उमड़ा भक्तों का रेला

लोहाघाट: देवीधुरा में चल रहे आषाड़ी कौतिक के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां ब्रज बाराही मंदिर में पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगी। आदि गुफा में स्थित मां के गर्भगृह के दर्शनों के लिए दिन भर आते रहे। कई लोगों ने विशेष पूजा अर्चना संपन्न करवाई। मां बाराही संस्कृत महाविद्यालय देवीधुरा के वेदपाठी छात्रों ने वेद पाठ व दुर्गा पाठ का वाचन किया। नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बरेली, टनकपुर, खटीमा आदि स्थानों से पहुंचे लोगों ने भी पूजा अर्चना में हिस्सा लिया। गहड़वाल खाम के प्रमुख त्रिलोक सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, बालिक खाम के बद्री सिंह बिष्ट, लमगड़िया खाम के प्रमुख वीरेंद्र लमगड़िया के अलावा अलावा मंदिर के पीठाचार्य भुवन चंद्र जोशी, कीर्ति बल्लभ शास्त्री ने भी पूजा अर्चना संपन्न करवाने में सहयोग किया। ======== बग्वालीवीरों ने पूरे दिन की मां बाराही की पूजा अर्चना संवाद सहयोगी, लोहाघाट : देवीधुरा मां बाराही धाम में होने वाली बग्वाल इंतजार की घड़ी समाप्त हो गई है। बग्वाली वीर भी तैयार है, और बग्वाल खेलने का मैदान भी सज गया है। मां बाराही धाम देवीधुरा के खोलीखांड़ दूबाचौड़ मैदान में आज चार खामों के बीचे दो भागों में बटकर अनूठी परंपरा बग्वाल खेली जाएगी। बग्वाल के मैदान में उतरने के लिए बुधवार को बग्वालीवीरों ने पूरे दिन मां बाराही की पूजा आराधना की। आज दोपहर बाद पूरे जोश खरोश के साथ यह बग्वाल युद्ध शुरू होगा।

रक्षाबंधन के दिन खेले जाने वाली बग्वाल की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन बीते 2013 से माननीय न्यायालय के आदेश के बाद पत्थरों की जगह अब फूल व फलों से बग्वाल खेली जाने लगी है। फलों में नाशपाती, सेब, संतरा आदि से बग्वाल खेली जाती है, लेकिन बग्वालीबीरों का मानना है कि वह आसमान में फलों को फेंकते है, लेकिन वह पत्थरों में तब्दील हो जाते है। क्षेत्र के बुजुर्ग लोगों के अनुसार पूर्व में यहां नरबली दी जाती थी, लेकिन एक समय ऐसा आया कि चम्याल खाम के एक बुजुर्ग महिला के परिवार में एक ही पोता शेष रह गया था, अगर वह पोते की बली दे तो पूरा वंश ही खत्म हो जाता। उस बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की दिन रात पूजा आराधना शुरू कर दी। उस महिला की पूजा से मां प्रसन्न हो गई। और नरबली की जगह दूसरा विकल्प खोजा गया। जिसमें चारों खामों के लोगों ने मां के आदेश के बाद बग्वाल खेलनी शुरू कर दी। इस बग्वाल में एक व्यक्ति के शरीर के बराबर रक्त बहता है। बताया जाता है कि मां बाराही किसी का भी रक्त नहीं लेती है। लेकिन मां बाराही का गण कलवा बेताल यह रक्त लेता है। रक्षा बंधन के दिन धर्म व आस्था के लिए लडे़ जाने युद्ध में मां बाराही की शक्ति का बखान करना भी लोक आस्था का ही हिस्सा है। जब युद्ध चरम सीमा पर होता है तब माइक से मंदिर के आचार्य इसकी गाथा का बखूबी बखान करते है। पूरे क्षेत्र के लोगों में मेले को लेकर खासा उत्साह बना हुआ है।

Posted By: Jagran

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