संवाद सहयोगी, गोपेश्वर : श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर में 'हिमालयी क्षेत्र की लोक संस्कृति एवं पर्यटन- उत्तराखंड के विशेष संदर्भ में' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार रंगारंग कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया है। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात संस्कृतिविद् प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि ढांचागत एवं अवस्थापना सुविधाओं के साथ-साथ लोक संस्कृति के संरक्षण एवं प्रस्तुतिकरण से ही पर्यटन बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, स्थानीय व्यंजनों, आभूषणों, पोशाकों, बोलियों, हस्तकला, धाíमक मेलों, उत्सवों, गायन, नृत्य, कृषि, बागवानी, नैसर्गिक ²श्यों, नदी, घराटों, झरनों, झीलों, जड़ी बूटियों, बुग्यालों आदि के संरक्षण एवं बेहतरीन प्रस्तुतिकरण से ही पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड को धाíमक, ऐतिहासिक, नैसर्गिक सर्किट में विकसित कर अधिकाधिक देशी विदेशी पर्यटकों को आकृष्ट किया जा सकता है। कार्यक्रम अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आरके गुप्ता ने कहा कि प्राकृतिक, आयुर्वेद चिकित्सा, योग, ध्यान एवं आध्यात्मिकता के प्रचार प्रसार से भी उत्तराखंड में पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजक सचिव डॉ. एसके लाल ने कहा कि पूरे सेमिनार में लगभग 30 शोध प्रस्तुत किए गए। सेमिनार में प्राप्त पर्यटन से संबंधित सिफारिशों एवं सुझावों को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा, जो उत्तराखंड की पर्यटन नीति बनाने में कारगर सिद्ध होगा। सेमिनार में 33 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रहे महाविद्यालय के लेखाधिकारी एनआर पुरोहित को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. आभा अग्रवाल, डॉ. बीएस नेगी, डॉ. दिनेश सती, डॉ. विनय नौटियाल, डॉ. गिरधर जोशी, डॉ. रमन बहुगुणा, डॉ. प्रशांत कंडारी, डॉ. भावना, डॉ. सरिता, डॉ. हेमलता, डॉ. हर्षी, शोधार्थी चंदा, हिमांशु, राजेन्द्र राणा, दीपक कुमार आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मीडिया को-ऑíडनेटर डॉ. दर्शन सिंह नेगी ने किया।

Posted By: Jagran

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