बदरीनाथ चढ़ावे में हेराफेरी: डेढ़ दशक पहले भी उठे थे गिनती को लेकर सवाल, कर्मचारियों ने किया था विरोध
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी के बाद मंदिर के खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।

कर्मचारियों के विरोध के चलते प्रस्ताव पर अमल नहीं कर पाई थी बदरी-केदार मंदिर समिति।
HighLights
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी से मंदिर की सुरक्षा पर सवाल
डेढ़ दशक पहले भी पारदर्शिता के लिए हुए थे प्रयास, विफल रहे
अब स्थानीय निकायों को शामिल करने, डांगरी लागू करने की मांग
संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद के बाद भगवान बदरी विशाल के खजाने की सुरक्षा पर ही सवाल उठने लगे हैं।
साथ ही चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को सुधारने के लिए वर्ष 2012-13 में किए गए प्रयासों की भी खूब चर्चा हो रही है। तब बीकेटीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट गणना के लिए एक अत्यंत पारदर्शी एवं सुरक्षित व्यवस्था अमल में लाने के निर्देश दिए थे और पहली बार मंदिर में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए थे।
पहले से चली आ रही अव्यवस्थाएं
बीकेटीसी प्रबंधन में अव्यवस्थाएं पूर्व से ही चली आ रही हैं। हालांकि, इसमें सुधार के प्रयास भी समय-समय पर होते रहे। खासकर बीकेटीसी के तत्कालीन अध्यक्ष स्व. अनुसूया प्रसाद भट्ट की इसमें अहम भूमिका रही, लेकिन बीकेटीसी कार्मिकों के विरोध के चलते उनकी मंशा फलीभूत नहीं हो पाई।
बताया गया कि तब गणना प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कर्मचारियों-अधिकारियों के अलावा माणा व बामणी के ग्राम प्रधान, नगर पंचायत बदरीनाथ व व्यापार सभा अध्यक्ष सहित स्थानीय प्रतिष्ठित नागरिकों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया था।
बताया गया कि तब तत्कालीन सीईओ की ओर से इस संबंध में बाकायदा पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन बीकेटीसी के अधिकारी-कर्मचारी इसके विरोध में उतर आए। कार्मिकों का तर्क था कि इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। ऐसे में विवाद गहराता देख बीकेटीसी को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
अब वर्तमान परिस्थिति में इन्हीं सुझावों पर अमल करने की मांग उठ रही है। जानकारों के अनुसार गणना कार्य में पारदर्शिता के लिए डांगरी (विशेष ड्रेस) जैसी व्यवस्था को लागू करना अनिवार्य है। डांगरी में जेब नहीं होती। हालांकि, धाम में कड़ाके की ठंड को देखते हुए इस ड्रेस कोड के क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं भी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का सुझाव है कि तकनीकी एवं व्यावहारिक समाधानों के साथ इसे सुचारू रूप से लागू किया जा सकता है।
कहा जा रहा कि बीकेटीसी को ग्राम प्रधान, महिला व युवक मंगल दल और व्यापार सभा जैसे स्थानीय निकायों को फिर से इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना चाहिए। जनसहभागिता और तकनीक का यह संगम न केवल दानपात्रों की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि धाम की वित्तीय शुचिता और गरिमा को भी अक्षुण्ण रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि अब बीकेटीसी को देश के बड़े मंदिरों से दान के रख-रखाव के बारे में जानने और सीखने की आवश्यकता है, ताकि चढ़ावे में हेराफेरी प्रकरण की पुनरावृत्ति न हो।
पिछले वर्ष गणना में तैनात किया गया था नौटियाल
चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपित वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को पिछले वर्ष गणना में शामिल किया था। बीते वर्ष 28 अप्रैल को बीकेटीसी की ओर से जारी आदेश में नौटियाल की रोस्टर के आधार पर चढ़ाव गणना में तैनाती की गई थी।
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