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बदरीनाथ कल्चरल फेस्टिवल विवाद, पर्यटन विभाग ने सेना पर डाली जिम्मेदारी

Published: Fri, 02 Oct 2026 03:35 PM (IST)

बदरीनाथ में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और डीजे को लेकर विवाद गहरा गया है। पर्यटन विभाग ने ...और पढ़ें

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संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में पिछले दिनों आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को लेकर उपजे विवाद में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान ने आग में घी का काम किया है। इस आयोजन में प्रशासन व सेना से बड़ी भूमिका पर्यटन विभाग की रही।

पर्यटन विभाग ने कार्यक्रम के आयोजन पर खूब वाहवाही भी लूटी। अब जब कुछ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के चयन व डीजे के शोर पर विवाद हुआ तो सारी जिम्मेदारी सेना पर डालकर पर्यटन विभाग के आला अधिकारी पर्दे से ही गायब हैं।

बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में 19 सितंबर से दो दिवसीय देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन हुआ। इसमें पर्यटन विभाग व सेना शामिल थे। बताया गया कि ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर इस आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में पर्यटन विभाग की अहम भूमिका रही। लेकिन, जब कुछ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को फूहड़ बताते हुए स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए तो सेना व प्रशासन के बीच विवाद खड़ा हो गया।

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सेना को दिया नोटिस

जिलाधिकारी ने सेना को कार्यक्रम की अनुमति सहित अन्य बिंदुओं पर नोटिस दिया है। सूत्रों के अनुसार, सेना इस नोटिस का जवाब देने के लिए अधिकारियों से रायशुमारी कर नियमानुसार कार्यवाही कर रही है, लेकिन विवाद के बाद आयोजन से जुड़े सेना के अधिकारी सकते में हैं।

कारण, आयोजन की जिम्मेदारी सिर्फ सेना पर डालकर पर्यटन विभाग ने उसे खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर दिया। यह जानते हुए भी कि बदरीनाथ धाम से सेना को गहरा लगाव है। सेना ‘बदरी विशाल लाल की जय’ के उद्घोष से अपने हर कार्य की शुरुआत करती है। यहीं नहीं, धाम के कपाट खुलने व बंद होने पर सेना का बैंड डोली यात्रा का अगुआ बनता है।

बताया गया बीते दो साल से हो रहे इस कार्यक्रम पर इस वर्ष 60 लाख से अधिक की राशि खर्च हुई। इसमें सेना के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत राशि दी जानी है। साथ ही पर्यटन विभाग को भी कार्यक्रम में बजट देना है। लेकिन, प्रस्तुतियों को लेकर हुए विवाद के बाद सेना को अकेले मोर्चे पर छोड़ दिया गया।

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बताया गया कि पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कार्यक्रम के लिए सांस्कृतिक टीमों के चयन में अहम भूमिका निभाई थी। अब ये अधिकारी विवाद के बीच तमाशबीन बने हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर सेना के अधिकारी ने बताया कि प्रशासन के नोटिस का जवाब सेना पीआरओ की ओर से दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन विभाग कार्यक्रम में बराबर का भागीदार था। इस संबंध में पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।