बदरीनाथ में 'म्यूजिक फेस्टिवल' पर विवाद: नाच-गाने और फूहड़ता का प्रदर्शन, धार्मिक मर्यादा भंग होने का आरोप
सेना द्वारा बदरीनाथ धाम में आयोजित सांस्कृतिक फेस्टिवल में गायकों की प्रस्तुतियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

बदरीनाथ धाम। File Photo

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संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। हाल ही में बदरीनाथ धाम में ''अराइवल प्लाजा'' में सेना द्वारा आयोजित फेस्टिवल आयोजन के दौरान नाच गाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। धर्म से जुड़े लोगों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कुछ गायकों की प्रस्तुति पर आपत्ति जताते हुए बदरीनाथ धाम की मर्यादा के खिलाफ बताया है।
कहा कि कुछ गायकों ने गीतों पर नाच-गाने और फूहड़ता का प्रदर्शन किया गया। हालांकि उत्तराखंड के व्यंजन, वेशभूषा और सेना के शौर्य का प्रदर्शन प्रशंसनीय है। यह कार्यक्रम दो वर्षों से पूरी तरह सेना आयोजित करती है। प्रशासन की भूमिका इस कार्यक्रम में सिर्फ राज्य में विकास को लेकर स्टाल लगाकर लोेगों को विभागीय जानकारी देने तक ही सीमित है।
सभी पुराणों में विस्तार से वर्णन
ज्योतिर्मठ के प्रभारी मुकुंदानंद ब्रहमचारी ने बदरीनाथ धाम के आध्यात्मिक माहात्म्य के विषय में सभी पुराणों में विस्तार से वर्णन किया गया है, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र धर्म की संतान के रूप में भगवान ''नर'' और ''नारायण'' का प्राकट्य हुआ।
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उन्होंने समस्त संसार के कल्याण हेतु बदरिकाश्रम के पावन क्षेत्र में आकर अत्यंत कठिन एवं दीर्घकालिक तपस्या की। शिवपुराण (कोटिरुद्र संहिता, 19वां अध्याय): बदरीवन की यात्रा करने वाला मनुष्य जीवनमुक्त हो जाता है, क्योंकि वहां भगवान नर-नारायण स्वयं लोक-कल्याण हेतु साधना में लीन हैं।
भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद रहने पर छ: महीने देवताओं की ओर से श्री नारद जी पूजा करते हैं। इस अवधि में मानवीय गतिविधियां पूर्णतः वर्जित रहती हैं। किंतु इस वर्ष कपाट खुलने से पूर्व भी स्थानीय सैन्य अधिकारियों एवं आयोजकों द्वारा कार्यक्रम विशेष का आयोजन किया गया, जो विगत अनेक वर्षों के इतिहास में अभूतपूर्व निन्दनीय घटना है और धार्मिक परंपरा का सीधा-सीधा उल्लंघन है।
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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इंटरनेट मीडिया पर इस आयोजन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बताया कि बदरीनाथ में सेना अगर भजन संध्या का कार्यक्रम करती तो बेहतर था लेकिन जिस प्रकार कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक महोत्सव के नाम पर यहां की संस्कृति से खिलवाड़ हुआ यह चिंतनीय है।
