जागरण संवाददाता, बागेश्वर : जिले में हरेला पर्व सभी जगह धूमधाम से मनाया गया। पूजा अर्चना के पश्चात दस दिन पहले बोए गए हरेले को काटकर मंदिरों में अíपत किया गया। घरों में विशेष पकवान भी बनाए गए।

श्रावण मास में पावन पर्व हरेला पर्व जिले में धूमधाम के साथ मनाया गया। मानव और प्रकृति के परस्पर प्रेम को दर्शाता यह पर्व हरियाली का प्रतीक है। सावन लगने से नौ दिन पहले बोई जाने वाली हरियाली को दसवें दिन काटा गया। जी रया जागि रया, यों दिन मास भेटनै रया..। यानी कि आप जीते-जागते रहें। हर दिन-महीनों से भेंट करते रहें..यह आशीर्वाद हरेले के दिन परिवार के वरिष्ठ सदस्य परिजनों को हरेला पूजते समय दिया गया। बहनों ने भाइयों को हरेला लगाकर उनकी सुख समृद्धि की कामना की। बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर हरेला के पौधे चढ़ाए। लोगों ने ईश्वर से रबी की अच्छी फसल होने की कामना की। उधर, कपकोट, कांडा, काफलीगैर, दुग नाकुरी, शामा आदि तहसीलों में हरेला पर्व पर स्थानीय देवी-देवताओं के मंदिरों में फल, फूल और हरेला अíपत किया गया।

Posted By: Jagran

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