घनश्याम जोशी, बागेश्वर: पर्यावरण, पेयजल और जैव विविधता को बचाने के लिए ग्राम्या फेस टू ने कमर कस ली है। शीतलाखेत में निíमत वीएल स्याही हलों का कपकोट में बकायदा प्रदर्शन भी किया गया है। किसानों को यह लौह हल बांटने का निर्णय लिया गया है। अलबत्ता अब हलों के लिए हरे पेड़ों की बलि नहीं चढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए यह स्याही लौह हल मुफीद साबित होंगे।

पर्यावरण, पेयजल और जैव विविधता को बचाने के उद्देश्य से वीएल स्याही हलों का कपकोट विकासखंड में प्रदर्शन किया जा रहा है और ग्राम्या फेज-टू इन हलों को किसानों को वितरित कर रही है। नवसृजन बहुउद्देशीय स्वायत्त सहकारिता, शीलतलाखेत ने 50 वीएल स्याही हल मुनार, गांसी, सलिग, रिखाड़ी, तोली, सुमगढ़ आदि किसानों को उपलब्ध कराए हैं। किसानों को तीन सौ रुपये के अंशदान से यह लौह हल दिए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार वीएल स्याही हलों के प्रचलन में आने से हल, नहेड़ आदि कृषि उपकरणों के लिए काटे जाने वाले बांज, सानण, मेहल आदि बहुपयोगी पेड़ों का कटाना रुकेगा और पेयजल स्त्रोत, पर्यावरण और जैवविविधता का संरक्षण होगा।

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नहीं कटेंगे छायादार पेड़

मुख्य कृषि अधिकारी वीके मौर्य ने कहा कि पहाड़ में लकड़ी से हल, नहेड़ आदि कृषि उपकरण बनाए जाते हैं। जिसके लिए छायादार पेड़ बांज, फल्यांट, सानण, मेहल, भिमल आदि काटे जाते हैं। वीएल स्याही हल पूरे तरह लोहे से बना हुआ है और इसके आने से पेड़ बचेंगे और पेयजल स्त्रोत, पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण होगा।

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सरकार से डिमांड

स्याही हल निर्माण गजेंद्र पाठक ने कहा कि सरकार द्वारा सूख रहे जल स्त्रोतों, नदियों को बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों में भी वीएल स्याही हलों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि किसानों द्वारा मजबूरी में कृषि उपकरणों को बनाने के लिए काटे जा रहे पेड़ बचाए जा सकें।

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वीएल स्याही हल लोहे से बने हुए हैं और अन्य उपकरण की भी किसानों को जरूरत नहीं है। ग्राम्य हल वितरण करा रही है और जैवविविधता का संरक्षण करने के लिए पेड़ों को कटने से बचाना होगा।

-नरेश बिनवाल, टीम लीडर, ग्राम्या।

Posted By: Jagran

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