जागरण संवाददाता, बागेश्वर : द्यांगण गांव में गुलदार की दहशत से पीड़ित परिवार ने घर छोड़ दिया है। जिस किशोर को निवाला बना लिया था, उसके पिता मानसिक संतुलन खो बैठे हैं तो मां मायके चली गई है। उनके मवेशियों को आस-पड़ोसी दाना-पानी दे रहे हैं। इसी तरह गांव के अन्य परिवार भी दहशत में हैं।

द्यांगण गांव के सुंदर ¨सह कठायत के 7 साल के मासूम करन ¨सह को गुलदार ने गत मंगलवार की शाम को निवाला बना लिया था। तब से गांव में दहशत फैली हुई है। घटना के बाद मासूम की मां रेखा देवी अपने बेटे कृष्णा ¨सह को लेकर अपने मायके गरुड़ क्षेत्र के सिरोली गांव चली गईं है, घर पर ताला लटका है और मासूम के पिता सुंदर घर नहीं आ रहे हैं। वह बेटे के गम में मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और इधर-उधर ही गुमसुम घूम रहे हैं। उनके पड़ोसी हीरा ¨सह कठायत ने बताया कि मृतक मासूम करन उनका रिश्ते में पोता था। उसकी मां गुलदार के भय से अपने मायके चली गई हैं। उन्होंने बताया कि मुआवजा तो दूर अभी तक वन विभाग ने पीड़ित परिवार की सुध नहीं ली है।

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बच्चों ने स्कूल छोड़ा

पीड़ित के घर पर ताले लगने से उसके मवेशियों को दादी माधवी देवी और भाई का परिवार देख रहा है। उन्होंने कहा कि वे भी कब तक मवेशियों को देखेंगे। एक गाय, बछड़ा और एक भैंस गोशाले में बंधी हुई हैं। चारा और पानी का इंतजाम कर रहे हैं। यदि आदमखोर नहीं मारा गया तो गांव के अन्य लोगों को भी गांव छोड़ना पड़ सकता है। गांव से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।

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मुआवजे की कार्रवाई चल रही है। अवकाश होने से कार्यालय बंद हैं, सोमवार को पीड़ित परिवार तक मुआवजे की रकम पहुंचा दी जाएगी। अल्मोड़ा से एक टीम यहां पहुंच गई है और वह गांव में गश्त कर रही है।

-आरके सिंह, डीएफओ, बागेश्वर

Posted By: Jagran