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बागेश्वर: हिरमोली गांव में चार दिन से धधक रहे जंगल, ग्रामीणों में आक्रोश

Published: Thu, 26 Feb 2026 03:57 PM (GMT+05:30)

बागेश्वर के धरमघर वन क्षेत्र में पुंगर कंपाट 4 और 5 में चार दिनों से जंगल जल रहे हैं। आग गांवों तक फैल गई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

चार दिनों से जंगलों में आग धधक रही है। Jagran

चार दिनों से जंगलों में आग धधक रही है। Jagran

HighLights

  1. धरमघर वन क्षेत्र में चार दिनों से जंगल में आग

  2. आग गांवों तक पहुंची, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

  3. पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित

जागरण संवाददाता, बागेश्वर। धरमघर वन क्षेत्र अंतर्गत पुंगर कंपाट चार तथा पांच में पिछले चार दिनों से जंगलों में आग धधक रही है। आग टाप से नीचे की ओर बढ़ते हुए गांवों की सिविल भूमि तक पहुंच गई, जिससे वहां लगे घास के लूटों को बचाना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, इसके बावजूद बच्चों को भी आग बुझाने में जुटना पड़ रहा है। उन्होंने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शीघ्र आग पर काबू पाने और आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुंगर कंपाट गांव के ऊपर स्थित जंगल लगातार जल रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद मौके पर अब तक कोई फायर वाचर या वन विभाग का कर्मचारी नहीं पहुंचा। बताया कि उन्होंने रेंज कार्यालय धरमघर तथा स्थानीय वन कार्यालय को इसकी सूचना दे दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर जंगलों में आग लगी है, वहीं दूसरी ओर वन निगम का कटान कार्य जारी है। छिलका और गुलिया बड़े पैमाने पर निकाली जा रही हैं। ग्रामीणों ने इसे जंगलों का दोहन और स्थानीय लोगों के साथ शोषण बताया है।

उनका कहना है कि आग से जहां वन्यजीव संकट में हैं, वहीं वनस्पति और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार धुआं फैलने से वातावरण प्रदूषित हो गया है, जिससे बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश उपाध्यक्ष हरगोविंद जोशी ने बताया कि उनके गांव हिरमोली के ऊपर के जंगल लगातार जल रहे हैं।

धुएं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल आग पर काबू पाने की मांग की है। पूर्व प्रधान सरस्वती देवी, सुरेश जोशी, केवलानंद, मोहन जोशी, लीला देवी, नीता देवी, प्रेमचंद, माधवानंद, देवीदत्त समेत अन्य ग्रामीणों ने भी वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

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