जागरण संवाददाता, बागेश्वर : बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन बनाने की मांग को लेकर तहसील परिसर में रेल आंदोलनकारियों का क्रमिक अनशन 37 वें दिन भी जारी रहा। उन्होंने अंतिम दम तक आंदोलन करने का निर्णय लिया।सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संघर्ष समिति के अध्यक्ष नीमा दफौटी ने सभा की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार रेल लाइन के लिए कतई संवेदनशील नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन 1882 में अंग्रेजों ने प्रस्ताव रखा। 1912 में रेल लाइन की पहली सर्वे हुई। टनकपुर से बागेश्वर की तरफ कुछ पटरी भी बिछाई गई। देश आजाद होने के बाद रेल लाइन पर सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 1980, 2006, 2009, 2010 में चार चरणों में रेल लाइन की सर्वे कराई जिसमें लाखों रुपये खर्च किए गए। 2011-12 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने रेल लाइन को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अब पंचेश्वर बांध का सपना देख रही है। जिससे रेल लाइन प्रभावित होगी। क्रमिक अनशन में लक्ष्मी धर्मशक्तू, पुष्पा देवी आदि बैठे। इस मौके पर खड़क राम आर्य, गो¨वद भंडारी, डुंगर ¨सह नेगी, लक्ष्मण ¨सह परिहार, आनंद बललभ तिवारी, मंगल ¨सह महर, अशोक वर्मा, दीवान राम आर्य, पार्वती पांडे, सरस्वती गैलाकोटी, मालती पांडे, सुरेंद्र ¨सह पिलख्वाल आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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