जागरण संवाददाता, बागेश्वर : गर्मी बढ़ने से तरह-तरह के रोग भी होने लगे हैं। नवजात शिशु और बच्चे बीमार पड़ने लगे हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ भी लगने लगी है।

सोमवार को जिला अस्पताल में करीब 500 मरीजों का पंजीकृत किया गया। जिसमें सबसे अधिक बच्चे थे। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. मनीष पंत के केबिन मे सुबह नौ बजे से दो बजे तक भीड़ रही। नवजात और एक माह से एक साल के बच्चों की संख्या में इजाफा रहा। उल्टी, पेट सूख जाना, बुखार और एलर्जी आदि की शिकायत थी। वहीं, मौसम बदलते ही बड़े लोगों को भी एलर्जी आदि ने घेर लिया है। डाक्टरों ने जरूरी दवाओं के साथ ही उन्हें तमाम टिप्स भी दिए। पानी उबाल कर पीने और शरीर को कपड़े से ढकने और धूप आदि में कम निकलने को कहा।

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एलर्जी वाले इनसे बचें

डॉ. पंकज पंत ने बताया कि एजर्जी बेहद कॉमन बीमारी है। किसी को खाने की चीज से, किसी को किसी खास महक से तो किसी को डॉग या कैट से एलर्जी हो सकती है। एलर्जी की कुछ और भी वजहें हैं। शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिऐक्ट करता है तो उसे एलर्जी कहते हैं। एलर्जी किसी खाने की चीज, पालतू जानवर, मौसम में बदलाव, कोई फूल-फल-सब्जी के सेवन, खुशबू, धूल, धुआं, दवा यानी किसी भी चीज से हो सकती है।

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एलर्जी गंभीर समस्या

डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता और नतीजा ऐसे रिऐक्शन के रूप में दिखता है। इस स्थिति में शरीर पर लाल-लाल चकत्ते निकलना, नाक और आंखों से पानी बहना, जी मितलाना, उलटी होना या फिर सांस तेज-तेज चलने से लेकर बुखार तक हो सकता है। ज्यादातर एलर्जी खतरनाक नहीं होतीं, लेकिन कभी-कभार समस्या गंभीर भी हो सकती है।

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इससे भी हो सकती है एलर्जी

मूंगफली, दूध, अंडा आदि खाने, धूल, कीट और मच्छर, खुशबू, घास आदि।

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जिला अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं हैं। डाक्टर पूरे मनोयोग से मरीजों की जांच कर रहे हैं। मौसम बदलने के साथ बीमारियां भी पैदा होती हैं, लोगों को सावधानी बरतनी जरूरी है।

-डॉ. एसपी त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल

Posted By: Jagran

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