उत्तराखंड के बागेश्वर में हादसा: पेड़ गिरा... उजड़ गया आशियाना, चीख-पुकार में बदल गया पूजा का माहौल
बागेश्वर के बनेगांव में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान एक विशाल सूखा चीड़ का पेड़ बंशीधर कांडपाल के घर पर गिर ...और पढ़ें

बागेश्वर के बनेगांव में घर पर गिरा चीड़ का पेड़। घर में रखा सामान भी दबा। सौ. ग्राम प्रधान।
HighLights
बनेगांव में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पेड़ गिरने से हादसा
परिवार का घर क्षतिग्रस्त, सदस्य घायल, अब बेघर हुए
ग्रामीणों ने खतरनाक पेड़ों को हटाने और मुआवजे की मांग की
घनश्याम जोशी, बागेश्वर । मंगलवार की शाम कमस्यार घाटी के बनेगांव में बंशीधर कांडपाल के घर धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। घर के आंगन और कमरों में बैठे लोग पूजा-पाठ और भक्ति में लीन थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही क्षणों में एक भयंकर हादसा पूरे परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा देगा।
अचानक तेज आंधी चली और घर के ऊपर खड़ा विशालकाय सूखा चीड़ का पेड़ भरभराकर मकान पर गिर पड़ा। जोरदार धमाके के साथ छत और दीवारें टूट गईं। पूजा का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, जबकि घर के भीतर मौजूद महिलाएं तथा स्वजन मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए।
भगवान के नाम का हो रहा था जाप
जिस घर में कुछ पल पहले भगवान के नाम का जाप हो रहा था, वहां देखते ही देखते भय और अफरा-तफरी का माहौल छा गया। ग्रामीणों ने दौड़कर घायलों को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। सभी की आंखों में एक ही सवाल था कि आखिर यह सब इतनी अचानक कैसे हो गया।
हादसे ने सिर्फ मकान की दीवारें ही नहीं तोड़ीं, बल्कि एक परिवार की वर्षों की मेहनत और सपनों को भी गहरा आघात पहुंचाया है। पेड़ गिरने से मकान का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घरेलू सामान, अनाज और जरूरी वस्तुएं भी मलबे में दब गईं। अब परिवार के सामने सिर छिपाने की चिंता भी खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे पहाड़ के लिए चेतावनी है। गांवों और कस्बों में आबादी के बीच खड़े सूखे और जर्जर पेड़ हर बरसात और आंधी में खतरे का कारण बन रहे हैं। लोग वर्षों से इन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग की अनुमति और अन्य प्रक्रियाओं के चलते समस्या जस की तस बनी हुई है।
बनेगांव की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जाए। यदि समय रहते ऐसे खतरनाक पेड़ों को चिन्हित कर हटाया जाता, तो शायद बंशीधर कांडपाल का परिवार आज इस मुश्किल दौर से नहीं गुजर रहा होता।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत, आर्थिक सहायता और मकान की क्षति का उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है और ऐसे समय में सरकारी मदद ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।
आस्था के बीच आई आपदा
ग्रामीण बताते हैं कि धार्मिक अनुष्ठान पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ चल रहा था। महिलाएं भजन-कीर्तन में शामिल थीं और घर में आध्यात्मिक वातावरण था। तभी अचानक आई तेज हवा ने सब कुछ बदल दिया। लोगों का कहना है कि ईश्वर की कृपा रही कि इससे भी बड़ी जनहानि नहीं हुई। सभी इसे एक ऐसा हादसा मान रहे हैं, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
खतरे की जड़ बने पुराने पेड़
जिले के गांवों और शहरों में कई पुराने और सूखे पेड़ आबादी के बीच खड़े हैं। बरसात और आंधी के दौरान ये पेड़ कभी भी गिर सकते हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से ऐसे पेड़ों को हटाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
