बागेश्वर: उफनती घांघली नदी पार कर रोज स्कूल जा रहे बच्चे, 25 साल बाद भी पूरी नहीं हुई पुल की मांग
गरुड़ के छटिया और स्याली गांवों के बीच घांघली नदी पर पुल न होने से बरसात में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
HighLights
घांघली नदी पर पुल न होने से बच्चों को जान का खतरा।
बरसात में नदी पार करना होता है मुश्किल, बढ़ता है सफर।
25 साल से पुल की मांग, ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, बागेश्वर। विकासखंड गरुड़ के छटिया और स्याली गांव के बीच घांघली नदी पर पैदल पुल नहीं होने से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की मुश्किलें बरसात में बढ़ जाती हैं।
नदी में पानी बढ़ने पर बच्चों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। नदी का जलस्तर और बहाव अधिक होने पर उन्हें करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार घांघली नदी पर पैदल पुल निर्माण की मांग करीब 25 वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। यह मार्ग क्षेत्र के पांच-छह गांवों के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन का साधन है। स्कूली बच्चे इसी रास्ते से विद्यालय जाते हैं, जबकि महिलाएं खेतीबाड़ी और ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी
क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रमोद जोशी का कहना है कि सामान्य दिनों में नदी पार करना किसी तरह संभव हो जाता है, लेकिन बरसात में घांघली नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही स्थिति खतरनाक हो जाती है। तेज बहाव के बीच स्कूली बच्चों को नदी पार करनी पड़ती है।
कई बार नदी का रौद्र रूप देखकर बच्चों और ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय कर दूसरे मार्ग से जाना पड़ता है। पैदल पुल नहीं बनने से ग्रामीणों में विभागीय उपेक्षा को लेकर आक्रोश है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा चुनाव से पूर्व पुल निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।
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