कबाड़ से बिजली और प्रकृति से मौसम ज्ञान... उत्तराखंड के बाल वैज्ञानिकों का अनूठा मॉडल
बाल वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए कबाड़ से बिजली, प्राकृतिक संकेतों से मौसम पूर्वानुमान और वर्षा जल संरक्षण के मॉडल बनाए हैं।

राजकीय इंटर कॉलेज सिरकोट के कक्षा नौ के विद्यार्थी अंकित सती तथा प्रांत गुप्ता ने ऊर्जा के लिए ई-4 मॉडल तैयार किया है।

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घनश्याम जोशी, जागरण, बागेश्वर । स्थानीय समस्याओं के समाधान की तलाश में विद्यार्थी विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान का सहारा ले रहे हैं। कहीं कबाड़ तथा पेल्टियर टाइल से बिजली बनाने का प्रयोग किया गया है, तो कहीं प्राकृतिक संकेतों से मौसम का अनुमान लगाने और वर्षा जल को सहेजने के उपाय सुझाए गए हैं।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एनसीएसटीसी नेटवर्क तथा गोल्डन न्यू एरा एजुकेशनल एंड सोशल सोसायटी की ओर से आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तीन बाल वैज्ञानिकों के मॉडल चयनित किए गए हैं।
अंकित सती व प्रांत गुप्ता ने ऊर्जा के लिए तैयार किया ई-4 मॉडल
राजकीय इंटर कॉलेज सिरकोट के कक्षा नौ के विद्यार्थी अंकित सती तथा प्रांत गुप्ता ने ऊर्जा के लिए ई-4 मॉडल तैयार किया है। इसमें कबाड़ और पेल्टियर टाइल के माध्यम से तापांतर तकनीक से विद्युत उत्पादन का प्रयोग किया गया। विद्यार्थियों के अनुसार, मॉडल में लगभग 0.6 वोल्ट वोल्टेज और 60 मिलीएम्पियर धारा प्राप्त हुई। यह प्रयोग अनुपयोगी सामग्री के पुनः उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा की संभावनाओं को दर्शाता है।
प्राकृतिक संकेतों से मौसम का पूर्वानुमान
पीएन श्री केंद्रीय विद्यालय, कौसानी की माही बजेली ने प्राचीन ज्ञान पर आधारित मौसम पूर्वानुमान परियोजना तैयार की है। उनकी टीम ने चींटियों के व्यवहार, हवा की दिशा और बादलों के रंग जैसे प्राकृतिक संकेतों का अध्ययन किया। उनके अनुसार, पुराने समय में इन संकेतों के आधार पर मौसम में संभावित बदलाव का अनुमान लगाया जाता था। परियोजना का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुभवों को सतत विकास से जोड़ना है।
कोमल आर्या ने नौलों-धारों के संरक्षण पर दिया जोर
आनंदी एकेडमी, घिरौली की कोमल आर्या ने जल संकट के समाधान के लिए वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर आधारित मॉडल बनाया है। इसमें छतों से वर्षा जल एकत्र करने, उसे छानने तथा नौलों और धारों के पानी का बेहतर उपयोग करने के उपाय सुझाए गए हैं।
मॉडल में जाली, अवसादन और चारकोल जैसी परतों से छनन व्यवस्था का प्रस्ताव है। छात्रा ने पानी के उपचार और सुरक्षित उपयोग की जरूरत भी रेखांकित की है। परियोजना में जल संचयन के साथ भूजल पुनर्भरण और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।
