जागरण संवाददाता, बागेश्वर: चंडिका मंदिर में बलि प्रथा की आशंका को लेकर जिला प्रशासन इतना आशंकित रहा कि मंदिर परिसर बीती मंगलवार की रात से छावनी में तब्दील हो गया। जिससे भक्तों और श्रद्धालुओं में काफी आक्रोश देखा गया और बकरियां चढ़ने के लिए मंदिर तक भी नहीं पहुंच पाई। मंदिर के कुछ दूरी से ही पुलिस ने बकरियों को लौटा दिया।

अदालत ने मंदिर आदि स्थानों पर बलि प्रथा पर रोक लगाई है। चंडिका मंदिर में करीब 18 साल बाद बैसी महायज्ञ का आयोजन किया गया है। अष्टमी पर्व पर पूर्व में यहां बकरी और भैंसे की बलि दी जाती थी, लेकिन अदालत के फैसले के बाद मंदिर कमेटी ने बलि नहीं करने का निर्णय लिया था, लेकिन कुछ श्रद्धालुजन अपनी मनौती को लेकर यहां बकरियां चढ़ाने लाने वाले थे। जिसकी भनक जिला प्रशासन को लग गई और आनन-फानन में एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी की अगुवाई में बैठक बुलाई गई और मंगलवार की रात से मंदिर परिसर को चारों तरफ से सुरक्षा कर्मियों ने घेर लिया। बुधवार की सुबह यहां श्रद्धालु बकरियां लेकर पहुंचने लगे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें मंदिर से काफी दूर रोक दिया और मायूस होकर वे घरों को लौट गए। जिससे मंदिर में बलि प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने में जिला प्रशासन कामयाब रहा। एसडीएम ने बताया कि मंदिरों में बलिप्रथा पर रोक है। बिना स्लाटर हाउस के बलि नहीं की जा सकती है और मंदिर कमेटी ने प्रशासन का साथ दिया है और कुप्रथा को समाप्त करने में प्रशासन को भी ताकत मिली है।

Posted By: Jagran

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