जागरण संवाददाता, बागेश्वर : नगर पालिका में पर्यावरण मित्रों की कमी से सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। सुबह दस बजे तक कूड़ा नहीं उठने से लोगों में भारी रोष है। पूर्व में नगर में सात वार्ड थे तब 33 पर्यावरण मित्र नियमित थे। जबकि आज भी इतने ही हैं। गत वर्षों में बरसात के सीजन में पालिका में दस से 20 पर्यावरण मित्रों को अलग से दैनिक वेतन पर रखा जाता था। अब 11 वार्ड हो गए हैं और कर्मचारी सिर्फ 33 हैं। जिससे 25045 जनसंख्या वाले नगर में सफाई व्यस्था पटरी से उतर गई है।

सरकार ने पालिकाओं को पर्यावरण मित्रों को रखने के लिए उपनल या फिर आउटसोर्स पर रखने के आदेश दिए हैं। जिसका पर्यावरण मित्रों ने विरोध करना शुरू कर दिया है और आउटसोर्स पर काम नहीं करने का निर्णय लिया है। जिससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और नगर पालिका को पर्यावरण मित्र उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जिससे स्टेशन रोड, घटबगड़, ट्रामा सेंटर, नुमाइशखेत, कठायतबाड़ा आदि स्थानों पर कूड़े के ढेर लग गए हैं। जिससे लोग भी आक्रोशित होने लगे हैं। राज्य आंदोलनकारी हीरा बल्लभ भट्ट, नंदा बल्लभ भट्ट, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष धीरज कोरगा, राजेंद्र उपाध्याय आदि ने कहा कि पालिका को तत्काल सफाई व्यवस्था ढर्रे पर लाने के लिए पर्यावरण मित्रों की नियुक्ति करनी होगी।

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संविदा पर नहीं रखे जाएंगे कर्मी

नगर पालिका अब संविदा पर किसी भी कर्मचारी को नहीं रख सकती है। सरकार के स्पष्ट आदेश के बाद पालिका ने कूड़ा रुख अपना लिया है। दैनिक वेतन पर भी कर्मचारी नहीं रखे जा सकते हैं। आउटसोर्स और उपनल के जरिए ही पर्यावरण मित्रों को रखा जा सकता है।

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जनसंख्या से कम कर्मी

शहर की जनसंख्या से पर्यावरण मित्रों की संख्या कम है। एक हजार जनसंख्या पर दो पर्यावरण मित्रों की तैनाती का नियम है। पालिका को कम से कम 51 पर्यावरण मित्रों की जरूरत है।

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संविदा खत्म हो गई है। दैनिक वेतन सिर्फ आठ हजार मिल रहा था। आउटसोर्स पर 12 हजार रुपये मानदेय है। जिसमें पीएफ और इंश्योरेंश की भी व्यवस्था है। कर्मचारियों को काम पर लौटने को कहा जा रहा है।

-राजदेव जायसी, ईओ

Posted By: Jagran

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