द्वाराहाट, अल्मोड़ा [जेएनएन]: तंत्र की बेरुखी से त्रस्त ईड़ा गांव के लोगों ने नई मिसाल पेश की है। कई बार आंदोलन के बावजूद विभाग ग्रामीणों को पेयजल मुहैया न करा सका तो लोगों ने खुद ही कमान संभाली। चंदा कर दो लाख रुपये जुटाए और शुरू कर दी रालक गधेरे में बोरिंग। दस दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार 50 फीट गहराई में पानी मिलने से लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

मालूम हो कि विकासखंड के अंतिम छोर के गाव ईड़ा के ग्रामीण लंबे समय से पानी की किल्लत से परेशान थे। पानी के लिए ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन भी किए और विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई। शासन-प्रशासन ग्रामीणों को पानी तो नहीं दे पाया लेकिन कोरे आश्वासन देता रहा और ग्रामीण प्यासे।

प्रशासन की बेस्खी से गुस्साएं जिपंस नीरज कुमार, बीडीसी राधिका देवी, प्रधान नीमा देवी, विक्रम सिंह, दिगंबर बिष्ट, दीपक बिष्ट व कौस्तुभ कुमार सिंह आदि ने खुद योजना के निर्माण के लिए ग्रामीणों को तैयार किया। दो लाख रुपये की धनराशि एकत्र होने पर रुद्रपुर की एक एजेंसी से सम्पर्क साध बोरिंग का काम शुरू कर दिया।

मजदूरों की जगह ग्रामीण खुद काम पर लगे। नतीजतन शनिवार को पानी मिला तो ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी झलकी। बोरिंग के पानी के लिए टैंक निर्माण कर ग्रामीणों को पेयजल मुहैया कराया जाएगा। ग्रामीणों के इस प्रयास की आसपास के लोगों ने सराहना की है।

यह भी पढ़ें: यह वृद्ध संवार रहा इस तालाब को, आसपास उगा दिया पूरा जंगल

यह भी पढ़ें: सोलह साल पहले शुरू की मुहीम हरे-भरे जंगल में हुई तब्दील

यह भी पढ़ें: इस गांव के लोगों ने तो उगा दिया पूरा जंगल, जानिए

Posted By: Bhanu